
लखनऊ 06 अक्टूबर। मरीजों के हित और दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने प्रदेशभर की रिटेल फार्मेसियों और अस्पताल परिसरों में संचालित फार्मेसियों के लिए नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत अस्पताल परिसरों में संचालित ऐसी फार्मेसियों, जहां मरीजों के पास दवाएं खरीदने के लिए व्यावहारिक रूप से सीमित विकल्प उपलब्ध होते हैं, वहां दवाओं की वास्तविक खरीद दर और बिक्री दर के आधार पर मूल्य सूची प्रदर्शित करना अनिवार्य किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य मरीजों को यह स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना है कि संबंधित दवा फार्मेसी द्वारा किस कीमत पर खरीदी गई और किस कीमत पर मरीज को बेची जा रही है। विभाग के इस कदम से दवाओं की कीमतों को लेकर पारदर्शिता बढ़ने और मरीजों को खरीदारी के समय अधिक जानकारी मिलने की उम्मीद है। आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन रोशन जैकब की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि पूर्व में जारी कार्यालय आदेश के तहत प्रदेश की सभी रिटेल फार्मेसियों को अपनी सार्वजनिक वेबसाइट तैयार करनी होगी। इस वेबसाइट पर फार्मेसी की लाइसेंस संख्या, नियुक्त फार्मासिस्ट, लाइसेंसी परिसर और स्टॉक से संबंधित आवश्यक विवरण सार्वजनिक करना होगा। इतना ही नहीं, वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी को नियमित रूप से, विशेष रूप से साप्ताहिक आधार पर अपडेट करना होगा, ताकि आमजन को फार्मेसी से संबंधित नवीनतम जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सके।
विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि फार्मेसियों को केवल निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को जानकारी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि आवश्यक सूचनाएं आम लोगों के लिए भी सार्वजनिक करनी होंगी। इसके लिए क्षेत्रीय अधिकारियों और औषधि निरीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित फार्मेसियों में निर्धारित व्यवस्था का अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में दवा खरीदने वाले मरीजों के लिए मूल्य सूची का प्रदर्शन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कई बार अस्पताल परिसर में उपचार करा रहे मरीजों के पास दवाएं खरीदने के लिए सीमित विकल्प होते हैं। ऐसे में खरीद दर और बिक्री दर की जानकारी सामने होने से मरीज और उनके परिजन दवा की कीमत को लेकर अधिक स्पष्ट जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से फार्मेसी संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा तथा मरीजों को दवाओं की कीमत से संबंधित जानकारी आसानी से मिल सकेगी।
निर्देशों के मुताबिक पूर्व में जारी आदेशों का क्रियान्वयन 1 नवंबर से अपेक्षित है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में फार्मेसियों द्वारा सभी निर्धारित निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है। विभाग द्वारा दवाओं के क्रय मूल्य, बिक्री मूल्य और मरीजों तक पहुंचने वाली कीमत के बीच पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों को दवा खरीदते समय अधिक जानकारी उपलब्ध होगी और फार्मेसियों की कार्यप्रणाली में भी जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलेगी। वहीं, इसी आदेश में दवा कारोबार से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय का भी उल्लेख किया गया है। 23 जुलाई को जारी आदेश के क्रम में आगामी नवरात्रि त्योहार को देखते हुए व्यापारियों के हित में 11 अक्टूबर से नए थोक बिक्री लाइसेंस जारी किए जाने पर लगी रोक हटाने का निर्णय लिया गया है। संबंधित अधिकारियों को इस निर्णय के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे नए थोक दवा कारोबार के लिए लाइसेंस लेने के इच्छुक कारोबारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, दवा दुकानों की जानकारी को सार्वजनिक करने और अस्पताल फार्मेसियों में खरीद-बिक्री दर प्रदर्शित करने की प्रस्तावित व्यवस्था को मरीजों के हित में दवा कारोबार को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।








