
हाथरस 02 अक्टूबर। मेला श्री दाऊजी महाराज के विशाल पंडाल में आयोजित ब्रज मंडलीय कवि सम्मेलन में ब्रज मंडल के विभिन्न जनपदों से पहुंचे करीब 75 कवि-कवयित्रियों ने विविध रसों से ओत-प्रोत काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वीर, हास्य, श्रृंगार, करुण, देशभक्ति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं पर देर रात तक तालियां गूंजती रहीं। कवि सम्मेलन का उद्घाटन भाजपा जिलाध्यक्ष प्रेम सिंह कुशवाह, ब्रज क्षेत्र उपाध्यक्ष शरद माहेश्वरी, जिला महामंत्री राजेश ‘गुड्डू’, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य एवं प्रभारी मीडिया सुनील वर्मा ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अमृत सिंह पौनिया ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में श्वेता दिवाकर, उषा गुप्ता, ब्रज कला केंद्र के अध्यक्ष चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य, शरद तिवारी, जीवन लाल शर्मा एवं मुकेश शर्मा मौजूद रहे। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में चेतन उपाध्याय, पूरन सागर, हरिशंकर वर्मा, पंडित अविनाश चंद्र पचौरी, पंडित ऋषि कुमार कौशिक एवं राधा कर्ण सहित अन्य सहयोगियों का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के संयोजक श्यामबाबू ‘चिंतन’ तथा सह-संयोजक प्रेम सिंह एडवोकेट रहे। मंच का प्रभावी संचालन आशुकवि अनिल बोहरे ने किया।
काव्य पाठ एवं सम्मान प्राप्त करने वाले प्रमुख रचनाकारों में प्रभु दयाल ‘प्रभु’, जीवन लाल शर्मा, इंदिरा जायसवाल (हाथरस), कवयित्री मनु दीक्षित (हाथरस), डॉ. अजय अटल (कासगंज), डॉ. रामदेव राही (छाता), राजेश राजस्थानी (इगलास), मुरारी लाल ‘मानव’ (एटा), अनुपम दीक्षित (आगरा), प्रमोद विषधर (सिकंदराराऊ), पंडित हाथरसी ‘गाफिल’ तथा स्वामी रोशन लाल वर्मा शामिल रहे। इन प्रमुख रचनाकारों के साथ ब्रज मंडल के विभिन्न क्षेत्रों से आए अन्य कवि-कवयित्रियों ने भी अपनी रचनाओं की प्रस्तुति देकर साहित्य और संस्कृति के विविध रंग बिखेरे। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्य, ब्रज संस्कृति, सामाजिक सरोकारों और देशभक्ति की भावनाओं को स्वर दिया। हास्य-व्यंग्य की रचनाओं ने जहां श्रोताओं को खूब गुदगुदाया, वहीं संवेदनशील एवं देशभक्ति से ओत-प्रोत प्रस्तुतियों ने वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। मेला श्री दाऊजी महाराज के विशाल पंडाल में आयोजित यह ब्रज मंडलीय कवि सम्मेलन साहित्य और संस्कृति का ऐसा संगम बना, जिसमें ब्रज की समृद्ध काव्य परंपरा के साथ हास्य-व्यंग्य, संवेदना, वीर रस और देशभक्ति की सुंदर छटा देखने को मिली। देर रात तक चले कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद श्रोताओं ने कवियों की रचनाओं का आनंद लिया और तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।










