हाथरस 24 सितम्बर। इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार रितिका चोपड़ा द्वारा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर प्रकाशित रिपोर्टों के बाद कांग्रेस के जिला प्रवक्ता डॉ. मुकेश चंद्रा ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने रिपोर्टिंग के लिए रितिका चोपड़ा की सराहना करते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। डॉ. मुकेश चंद्रा ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार के दबाव में सत्ता लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा अन्य चुनाव आयुक्तों को दरकिनार करते हुए नियम विरुद्ध निर्णय लिए गए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को कथित अनियमितताओं पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि कोई गलती हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब इंडियन एक्सप्रेस की रितिका चोपड़ा की रिपोर्टों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू एवं विवेक जोशी के बीच कई मुद्दों पर दर्ज असहमतियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ कदमों पर आपत्तियां दर्ज कीं। इनमें मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने तथा चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आईटी सिस्टम से संबंधित मुद्दे शामिल बताए गए हैं। एक अन्य रिपोर्ट में रितिका चोपड़ा ने फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का उल्लेख किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म में एसआईआर से जुड़े सवाल जोड़े गए थे और दोनों आयुक्तों ने इस बदलाव को “illegal” और “unauthorised” बताते हुए आपत्ति दर्ज की थी।
डॉ. चंद्रा ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी एसआईआर तथा मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने चुनाव आयोग का बचाव किया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के माध्यम से चुनावी लाभ लेने का प्रयास किया। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सभी सवालों का सार्वजनिक रूप से जवाब दिया जाए और यदि किसी अधिकारी द्वारा नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित मामलों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की ओर से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार वह मतदाता सूची के पंजीकरण, संशोधन और नाम हटाने की प्रक्रिया संचालित करता है। आयोग की वेबसाइट पर एसआईआर-2026, मतदाता सूची, फॉर्म-6 तथा अपील से संबंधित सेवाएं उपलब्ध हैं। वहीं, एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी कार्यवाही हुई है। मई 2026 में अदालत ने बिहार में एसआईआर की वैधानिकता को बरकरार रखते हुए कहा था कि प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को सटीक एवं विश्वसनीय बनाना है।










