
लखनऊ/हाथरस 19 सितम्बर। उत्तर प्रदेश में 7 से 9 सीटर निजी वाहनों के मालिकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। परिवहन विभाग ने वर्ष 2005 में जारी उस आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है, जिसके तहत छह से अधिक और नौ सीट तक क्षमता वाले गैर-परिवहन यानी निजी वाहनों के लिए फिटनेस प्रमाण-पत्र अनिवार्य किया गया था। नए आदेश के बाद स्कॉर्पियो, इनोवा, अर्टिगा, सफारी जैसी 7 से 9 सीटर निजी गाड़ियों को केवल सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस प्रमाण-पत्र बनवाने की जरूरत नहीं होगी। परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत गैर-परिवहन वाहनों पर केवल सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस की शर्त लागू करना उचित नहीं था। आदेश के मुताबिक गैर-परिवहन वाहनों के फिटनेस से संबंधित नियम निर्धारित करने का अधिकार केंद्र सरकार के स्तर पर है। इसी कानूनी स्थिति को देखते हुए परिवहन विभाग ने 12 दिसंबर 2005 को जारी आदेश को निरस्त कर दिया है।
इस फैसले से निजी वाहन मालिकों को फिटनेस प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए आरटीओ कार्यालय जाने, निर्धारित फिटनेस शुल्क जमा करने और इससे जुड़ी विभागीय प्रक्रिया से राहत मिलेगी। खासतौर पर 7 से 9 सीटर एसयूवी और एमयूवी रखने वाले परिवारों को अब केवल सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। हालांकि, फिटनेस जांच की अनिवार्यता समाप्त होने से सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल भी उठ सकते हैं। पुरानी निजी गाड़ियों की नियमित तकनीकी जांच नहीं होने पर खराब हालत वाले वाहनों की कमियां समय पर सामने नहीं आने की आशंका रहेगी। ऐसे में वाहन मालिकों की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी कि वे अपनी गाड़ियों की नियमित सर्विसिंग और तकनीकी जांच कराते रहें। गाजियाबाद में पंजीकृत एक लाख से अधिक निजी वाहनों के मालिकों को भी इस फैसले का सीधा लाभ मिलने की बात कही जा रही है। अब इन वाहनों के लिए केवल सात से नौ सीट की क्षमता के आधार पर फिटनेस प्रमाण-पत्र की अनिवार्यता लागू नहीं होगी।








