
हाथरस 16 सितम्बर। मेला श्री दाऊजी महाराज के 62 वर्षीय ब्रजभाषा कवि सम्मेलन के इतिहास में इस वर्ष एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। पहली बार तमिलनाडु से कोई कवयित्री ब्रजभाषा में काव्य पाठ करने हाथरस पहुंचेगी। राष्ट्रीय कवि संगम तमिलनाडु की मंत्री कवयित्री आरती गौड़ मदरासी ब्रजभाषा कवि सम्मेलन में अपनी रचनाएं प्रस्तुत करेंगी। वहीं पिछले करीब 30 वर्षों से निरंतर प्रदान किए जा रहे ब्रज कवि पं. सुरेश चतुर्वेदी स्मृति पुरस्कार से इस वर्ष आरती गौड़ मदरासी को सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। उन्हें 11 हजार रुपये नकद, अंगवस्त्र, प्रशस्ति-पत्र और प्रतीक चिन्ह प्रदान किया जाएगा। यह निर्णय ब्रजभाषा कवि सम्मेलन के संयोजक आशु कवि अनिल बौहरे के निवास पर वरिष्ठ कवि श्यामबाबू चिंतन की अध्यक्षता में हुई बैठक में साहित्यकार विद्यासागर विकल के प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से लिया गया। इसके उपरांत सीकनापान गली स्थित सुप्रसिद्ध प्राचीन गणेश मंदिर परिसर में हिन्दी दिवस के अवसर पर गणेश चतुर्थी आनंदोत्सव कवि सम्मेलन का आयोजन ब्रज कला केंद्र के बैनर तले किया गया। करीब तीन घंटे चले इस धार्मिक एवं साहित्यिक कवि सम्मेलन का शुभारंभ सुकवि रोशनलाल वर्मा ने गणपति वंदना से किया। शाहजहांपुर से आए हास्य कवि सुखप्रीत सिंह सुक्खी तथा सोखना के हास्य-व्यंग्य कवि पंडित हाथरसी ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खूब हंसाया। डॉ. नितिन मिश्रा के गीत ‘सबको अपनी राम राम जी’ और डॉ. उपेंद्र झा की हास्य रचना ‘आंखों के डॉक्टर को आते में भी आंख दिखाते हैं और जाते में भी आंख दिखाते हैं’ पर खूब तालियां बजीं।
सुकवि श्यामबाबू चिंतन और जीवन लाल शर्मा ने अपने विविध रंग के दोहों से समां बांधा। इगलास के गाफिल स्वामी ने ‘जय जय हो गणपति महाराजा’ रचना प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय कर दिया। पूरन सागर ने ‘शराब ने कर दी जिंदगी खराब है’ शीर्षक प्रेरणादायक रचना प्रस्तुत की। वहीं कैरोना से आए चांद हुसैन चांद ने अपनी रचना के माध्यम से बुढ़ापे की दुश्वारियों का हास्य अंदाज में वर्णन किया। ओजस्वी कवि चेतन उपाध्याय ने ‘राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं’ रचना प्रस्तुत कर श्रोताओं में जोश भरा। कवि सम्मेलन का संचालन करते हुए आशु कवि अनिल बौहरे ने हिन्दी को लेकर अपनी रचना प्रस्तुत की। उनकी पंक्तियां ‘हिन्दी वालों ने हिन्दी की कर दी हिन्दी है, हिन्दी विकास नाम पर गणेश बुद्धि बिंदी है’ श्रोताओं के बीच चर्चा का विषय रहीं और जमकर तालियां बजीं। मुख्य अतिथि चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने कहा कि आज के बदलते सामाजिक परिवेश में दिमाग को स्वस्थ रखने की खुराक कवि सम्मेलनों की साहित्यिक रचनाओं से मिलती है, इसलिए लोगों को कवि सम्मेलनों में जरूर जाना चाहिए। कार्यक्रम में कवियों का सम्मान पं. गौरव आनंद मिश्र और सौरभ शास्त्री के निर्देशन में विनोद अग्रवाल, विपिन अग्रवाल, ओम प्रकाश यादव, ब्रज किशोर खंडेलवाल, रामकिशन अग्रवाल, छत्रपाल तथा मुन्नालाल अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम का छायांकन बालकवि विष्णु ने किया। अध्यक्षता कर रहे साहित्यकार गोपाल चतुर्वेदी ने मेला श्री दाऊजी महाराज के कवि सम्मेलनों में अधिक से अधिक श्रोताओं से पहुंचने का आह्वान किया। अंत में कवि सम्मेलन के आयोजक एवं गणेश मंदिर के महंत पंडित ब्रह्मानंद जी ने सभी का आभार व्यक्त किया और सैकड़ों भक्तों को प्रसादी भोज कराया।








