
हाथरस 12 सितम्बर। अलीगढ़ रोड स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु नानक दरबार में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का 422वां पहला प्रकाश पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया। प्रकाश पर्व के अवसर पर गुरुद्वारा परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया और बड़ी संख्या में साध-संगत ने गुरुद्वारा पहुंचकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के समक्ष माथा टेका तथा गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया। प्रकाश पर्व के अवसर पर रविवार को प्रातः 10 बजे खुले अखंड पाठ साहिब के समापन के बाद विशेष शब्द कीर्तन का आयोजन किया गया। गुरुद्वारा के मीत ज्ञानी नानक सिंह जी ने गुरबाणी का मधुर कीर्तन कर संगत को निहाल किया। कीर्तन के दौरान गुरुद्वारा परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा और संगत ने श्रद्धा के साथ गुरु की वाणी का श्रवण किया। गुरुद्वारा के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी हरपाल सिंह जी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के इतिहास और प्रथम प्रकाश के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश वर्ष 1604 में श्री हरमंदिर साहिब, अमृतसर में किया गया था। उन्होंने बताया कि बाबा बुढ़ा जी को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला मुख्य ग्रंथी नियुक्त किया गया था। उन्होंने संगत को गुरु साहिब के इतिहास, गुरु वाणी और उसके आध्यात्मिक महत्व के बारे में भी जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी केवल सिख समाज के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेम, समानता, भाईचारे, सेवा और सद्भावना का संदेश देते हैं। गुरु साहिब की वाणी मनुष्य को सच्चाई और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।प्रकाश पर्व के अवसर पर गुरुद्वारा परिसर में विशेष फूलों की सजावट भी की गई। फूलों की सजावट की सेवा तजवंत कालरा जी की ओर से की गई। वहीं खुले पाठ साहिब की सेवा हरबंस लाल अंतरेजा की ओर से की गई। गुरुजी के नगर की सेवा श्रीमती कल्पना उपाध्याय, पत्नी रामेश्वर उपाध्याय जी की ओर से की गई। विभिन्न सेवाओं में संगत ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और गुरु घर की सेवा में अपना योगदान दिया।
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन प्रकाश पर्व देश ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। श्री हरमंदिर साहिब, अमृतसर में भी प्रकाश पर्व के अवसर पर विशेष सजावट की गई। इसी क्रम में हाथरस के गुरुद्वारा श्री गुरु नानक दरबार को भी फूलों से आकर्षक रूप से सजाया गया। शब्द कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम के उपरांत गुरु साहिब के समक्ष अरदास की गई। इसके बाद संगत के लिए अटूट लंगर बरताया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरु का लंगर ग्रहण किया। इस दौरान सेवा, श्रद्धा और भाईचारे का सुंदर वातावरण देखने को मिला। प्रकाश पर्व के आयोजन को सफल बनाने में गुरुद्वारे की समूह साध-संगत का विशेष सहयोग रहा। संगत ने सेवा, सहयोग और समर्पण के साथ कार्यक्रम में भाग लेते हुए प्रकाश पर्व को श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया।










