हाथरस 12 सितम्बर। जैन समाज के महापर्व पर्युषण पर्व के पांचवें दिन लोहिया धर्मशाला, डिब्बा गली स्थित जैन स्थानक में अणुव्रत चेतना दिवस श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर दिल्ली से आए स्वाध्याय बंधु महेंद्र जैन एवं सुलेख जैन ने ज्ञान चर्चा के माध्यम से अणुव्रत के महत्व पर प्रकाश डाला। स्वाध्याय बंधुओं ने बताया कि पर्युषण पर्वाधिराज का पांचवां दिन अणुव्रत चेतना दिवस के रूप में मनाया जाता है। अणुव्रत मनुष्य के दैनिक जीवन को मर्यादित, सदाचारी और संयमित बनाने का सरल मार्ग है। उन्होंने कहा कि अणुव्रत का अर्थ बड़े-बड़े त्याग करना नहीं, बल्कि अपनी सामर्थ्य के अनुसार छोटे-छोटे नियम अपनाकर जीवन में नैतिकता और आचरण की शुद्धता लाना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान भौतिकतावादी युग में अणुव्रत की चेतना समाज को सही दिशा प्रदान कर सकती है। जब व्यक्ति अनावश्यक हिंसा, असत्य, चोरी, अशुद्ध आचरण और अत्यधिक परिग्रह से बचने के छोटे-छोटे संकल्प लेता है, तभी उसके भीतर वास्तविक आध्यात्मिक जागृति का विकास होता है। इच्छाओं और आवश्यकताओं की सीमा निर्धारित करना आत्मकल्याण का महत्वपूर्ण आधार है।
स्वाध्याय बंधुओं ने धर्मप्रेमियों से आह्वान किया कि अणुव्रत चेतना दिवस के अवसर पर प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक नया अणुव्रत अथवा छोटा नियम धारण करने का संकल्प ले। इससे व्यक्तिगत आचरण में सुधार के साथ परिवार और समाज में भी शांति, सद्भाव एवं नैतिकता का वातावरण विकसित होगा। कार्यक्रम में लोहिया धर्मशाला के प्रबंधक मंत्री सुरेश चंद्र जैन, जैन नवयुवक सभा के अध्यक्ष उमाशंकर जैन, सुनील वर्मा, अध्यक्ष मनोज जैन, अतुल कुमार जैन एडवोकेट, राकेश जैन, सलिल जैन, विजय जैन, मयंक जैन, अनिल कुमार जैन, राजकुमार जैन, राजकुमार बठिया, वैभव जैन, कोषाध्यक्ष अरुण जैन, मनु जैन, सोनू जैन, बलवीर जैन, हर्ष जैन, डॉ. डी.के. जैन सहित समाज के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में जैन समाज के पुरुष, महिलाएं एवं बच्चे भी कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी ने पर्युषण पर्व के दौरान संयम, आत्मचिंतन और सदाचार को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।







