हाथरस 11 सितम्बर। जनपद के शहर, कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों में कथित रूप से अप्रशिक्षित झोलाछाप चिकित्सकों और बिना निर्धारित मानकों के संचालित किए जा रहे अवैध चिकित्सा केंद्रों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप हैं कि कई स्थानों पर बिना आवश्यक शैक्षिक योग्यता, वैध पंजीकरण और निर्धारित मानकों के क्लीनिक, अस्पताल, नर्सिंग होम तथा पैथोलॉजी लैब संचालित की जा रही हैं। ऐसे केंद्रों पर मरीजों के उपचार और जांच के नाम पर स्वास्थ्य के साथ लापरवाही किए जाने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव और आर्थिक मजबूरियों के चलते बड़ी संख्या में लोग स्थानीय स्तर पर संचालित ऐसे कथित चिकित्सा केंद्रों का सहारा लेते हैं। आरोप है कि कुछ संचालक स्वयं को चिकित्सक बताकर मरीजों का उपचार करते हैं, जबकि उनके पास आवश्यक योग्यता अथवा वैध पंजीकरण नहीं है। सामान्य बीमारियों से लेकर गंभीर मामलों तक में मरीजों को दवाएं और इंजेक्शन दिए जाने की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं। वहीं कुछ स्थानों पर निर्धारित मानकों के बिना पैथोलॉजी लैब संचालित होने के आरोप भी हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इन केंद्रों पर मरीजों की जांच के लिए प्रशिक्षित स्टाफ, आवश्यक उपकरण, साफ-सफाई और अन्य निर्धारित मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
नियमों की अनदेखी पर जिम्मेदार कौन?
स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर अवैध रूप से संचालित क्लीनिक और पैथोलॉजी सेंटरों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की बात कही जाती है, लेकिन इसके बावजूद शहर, ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में ऐसे कथित केंद्रों के संचालन की शिकायतें सामने आना विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यदि बिना पंजीकरण और आवश्यक योग्यता के कोई व्यक्ति मरीजों का उपचार कर रहा है तो उसके खिलाफ समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती, यह भी बड़ा सवाल है।
मरीजों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा
स्वास्थ्य सेवाओं में छोटी सी लापरवाही भी मरीज के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। गलत दवा, गलत इंजेक्शन, गलत जांच रिपोर्ट अथवा गंभीर बीमारी का समय पर सही उपचार न मिलने से मरीज की स्थिति बिगड़ सकती है। ऐसे में बिना निर्धारित योग्यता और मानकों के चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि जनपद के ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में संचालित निजी क्लीनिक, अस्पताल, नर्सिंग होम और पैथोलॉजी लैब की व्यापक जांच कराई जाए। जिन संस्थानों के पास वैध पंजीकरण, निर्धारित योग्यता अथवा आवश्यक मानक नहीं हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। अब सवाल यह है कि विभागीय निगरानी के बावजूद यदि ऐसे कथित चिकित्सा केंद्र संचालित हो रहे हैं तो इन पर कार्रवाई कब होगी और मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?








