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सादाबाद (सहपऊ) 08 सितम्बर। सहपऊ थाना क्षेत्र के गांव थरौरा में मकान पर कब्जे के प्रयास और विरोध करने पर घर में घुसकर मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। गांव निवासी एक महिला ने छह-सात नामजद लोगों पर मकान की दीवार और गेट तोड़ने, गाली-गलौज, मारपीट, छेड़छाड़ तथा जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने पुलिस पर शिकायत के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं करने का भी आरोप लगाया है। गांव थरौरा निवासी शीला देवी पत्नी रामेश्वर ने बताया कि 29 अगस्त 2026 की शाम करीब चार बजे गांव के ही छह-सात नामजद लोग उनके घर पहुंचे और कथित रूप से मकान की दीवार गिराने तथा गेट तोड़ने लगे। परिवार के लोगों ने जब इसका विरोध करते हुए कारण पूछा तो आरोपियों ने कथित तौर पर कहा कि उन्होंने मकान खरीद लिया है। पीड़िता के अनुसार, उनके पति रामेश्वर ने आरोपियों से मकान खरीदने से संबंधित दस्तावेज दिखाने को कहा। उनका कहना था कि उनके पिता बाहर रहते हैं और उन्होंने मकान कब बेचा, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। आरोप है कि दस्तावेज दिखाने की बात कहने और दीवार व गेट तोड़े जाने का विरोध करने पर नामजद लोगों ने गाली-गलौज शुरू कर दी और मारपीट करने लगे। शीला देवी के मुताबिक विवाद बढ़ने पर वह घर के अंदर चली गईं, लेकिन आरोप है कि उक्त लोग घर में घुस आए और लाठी-डंडों से उनके साथ मारपीट की। महिला ने छेड़छाड़ एवं अभद्रता करने का भी आरोप लगाया है। शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचने लगे, जिसके बाद आरोपी कथित रूप से जान से मारने की धमकी देते हुए वहां से चले गए। पीड़िता का कहना है कि मारपीट में उनकी आंख सहित शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आई हैं। घटना के बाद वह अपने पति के साथ सहपऊ थाने पहुंचीं और पुलिस को लिखित तहरीर दी। पीड़िता के अनुसार, थाना प्रभारी ने उपनिरीक्षक को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए और तहरीर संबंधित दरोगा को देने के लिए कहा, लेकिन आरोप है कि उपनिरीक्षक ने उनकी तहरीर नहीं ली और उन्हें वहां से जाने के लिए कह दिया। महिला का यह भी आरोप है कि उनका मेडिकल परीक्षण नहीं कराया गया। इसके बाद पीड़िता ने उपजिलाधिकारी तथा क्षेत्राधिकारी सादाबाद से भी शिकायत की, लेकिन उनके मुताबिक अभी तक मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़िता ने बताया कि 8 सितंबर को उपनिरीक्षक ने उन्हें थाने बुलाया था और कार्रवाई के साथ मेडिकल कराने की बात कही थी। आरोप है कि जब वह अपने पति के साथ थाने पहुंचीं तो प्रभारी की ओर से कथित तौर पर कहा गया कि पहले कब्जा हो जाने दो। इस पर उनके पति ने आपत्ति जताते हुए पूछा कि कब्जा कैसे होने दें, तो आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें डरा-धमकाकर वहां से जाने को कहा। पीड़िता का कहना है कि घटना को 11 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक आरोपियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि दबंगों द्वारा कथित रूप से पुलिस से मिलीभगत कर कार्रवाई प्रभावित की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। पुलिस का पक्ष जानने का प्रयास: मामले में सहपऊ थाने के हल्का इंचार्ज उपनिरीक्षक रामवीर सिंह से उनका पक्ष जानने के लिए मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। वहीं सहपऊ कोतवाली प्रभारी मयंक चौधरी से कोतवाली के सीयूजी नंबर पर संपर्क कर जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन नंबर नेटवर्क क्षेत्र से बाहर बताया गया। पुलिस का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा।

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