
हाथरस 05 सितम्बर। नगर पालिका परिषद हाथरस के जलकल विभाग में तैनात रहे तत्कालीन अवर अभियंता (जेई) हर्षवर्धन की अग्रिम जमानत याचिका को अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-6 ने क्षेत्राधिकार के अभाव में निरस्त कर दिया। मामला फर्जी दस्तावेज तैयार करने, निविदाओं में धरोहर राशि की एफडीआर में कथित धांधली और भ्रष्टाचार से जुड़ा है। वर्तमान में हर्षवर्धन चंदौली जिले की पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर की नगर पालिका में तैनात बताए गए हैं।
मामले की शुरुआत साकेत कॉलोनी निवासी प्रशांत कौशिक की शिकायत से हुई थी। शिकायत के बाद 10 मार्च 2025 को प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए त्रिसदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति में अपर जिलाधिकारी न्यायिक, उपजिलाधिकारी और वरिष्ठ कोषाधिकारी को शामिल किया गया था। जांच में जेई हर्षवर्धन पर पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी एफडीआर तैयार कराने, बैंकों की नकली मोहरों से उनका सत्यापन करने और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना निविदादाताओं की धरोहर राशि वापस कराने संबंधी अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई। जांच में वित्तीय वर्ष 2023-24 में हैंडपंप स्थापना की माप पुस्तिकाओं में हेरफेर कर 5,30,586 रुपये का अधिक भुगतान कराने की अनियमितता भी सामने आई थी। इससे पहले मामले में जेई के निलंबन और एफआईआर की संस्तुति भी की गई थी।
जांच रिपोर्ट के आधार पर कोतवाली हाथरस गेट में 31 मई 2025 को हर्षवर्धन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। विवेचना के दौरान पुलिस ने मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7/13 की बढ़ोतरी की और चार जुलाई 2026 को आरोप पत्र दाखिल कर दिया। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं शामिल होने के चलते अग्रिम जमानत के लिए न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की गई थी।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित मामलों की सुनवाई का क्षेत्राधिकार जनपद अलीगढ़ स्थित न्यायालय के पास है, जबकि हाथरस न्यायालय इस मामले की सुनवाई के लिए क्षेत्राधिकार नहीं रखता। इसी आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-6 ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना हर्षवर्धन की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी।













