
हाथरस 02 सितम्बर । जनपद के सरकारी विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को बेहतर, सुरक्षित और गरिमापूर्ण शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने की मांग को लेकर एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक ह्यूमन राइट्स द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए विस्तृत ज्ञापन का जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया है। जिलाधिकारी के निर्देश के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जनपद के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराने के निर्देश जारी किए हैं। एडीएचआर के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय और जिलाध्यक्ष कमलकांत दोवराबाल ने 27 अगस्त को जिलाधिकारी अतुल वत्स की उपस्थिति में ओसी कलेक्ट्रेट उपजिलाधिकारी अर्चना शर्मा को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में सरकारी विद्यालयों की शैक्षिक एवं बुनियादी व्यवस्थाओं में सुधार की मांग प्रमुखता से उठाई गई थी। एडीएचआर ने अपने ज्ञापन में कहा था कि शिक्षा का अधिकार केवल विद्यालय में प्रवेश तक सीमित नहीं है। प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित विद्यालय भवन, स्वच्छ पेयजल, क्रियाशील शौचालय, पर्याप्त कक्षाएं, उचित फर्नीचर, पर्याप्त शिक्षक, पौष्टिक मध्यान्ह भोजन और सम्मानजनक शैक्षिक वातावरण उपलब्ध होना भी जरूरी है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर बीएसए ने जारी किया पत्र
ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी अतुल वत्स ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके अनुपालन में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा पत्रांक 9264-68/2026-27, दिनांक 1 सितंबर के माध्यम से जनपद के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। पत्र में विद्यालयों में आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से सुनिश्चित कराने तथा की गई कार्रवाई की आख्या जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में उपलब्ध कराने को कहा गया है।
18 प्रमुख बिंदुओं पर कार्रवाई के निर्देश
बीएसए के पत्र में एडीएचआर के ज्ञापन के साथ संलग्न मांगों एवं व्यवस्थाओं को विद्यालयों में समयान्तर्गत सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था।
- स्वच्छ एवं क्रियाशील शौचालय।
- जर्जर विद्यालय भवनों का सर्वेक्षण एवं आवश्यक कार्रवाई।
- छात्र संख्या के अनुसार पर्याप्त एवं सुरक्षित कक्षाएं।
- प्रत्येक बच्चे के लिए उचित फर्नीचर।
- स्वच्छ एवं खेलने योग्य खेल मैदान।
- विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता।
- गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक मध्यान्ह भोजन।
- गुणवत्तापूर्ण ड्रेस एवं शैक्षिक सामग्री।
- बिजली, पंखे एवं पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था।
- स्वच्छ एवं सुरक्षित विद्यालय परिसर।
- बालिकाओं के लिए विशेष सुविधाएं।
- दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाएं एवं सुगम आवागमन।
- विद्यालयों का नियमित एवं प्रभावी निरीक्षण।
- विद्यालयवार सार्वजनिक रिपोर्ट तैयार करने की व्यवस्था।
- प्रभावी शिकायत एवं निगरानी व्यवस्था।
- बच्चों की गरिमा एवं सुरक्षा तथा भेदभाव रहित वातावरण सुनिश्चित करना।
- विद्यार्थियों की शैक्षिक गुणवत्ता, उपस्थिति एवं सीखने के स्तर की समीक्षा।
सिर्फ प्रवेश नहीं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी जरूरी
एडीएचआर के ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 और 21-क का उल्लेख करते हुए कहा गया था कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार को वास्तविक रूप से सार्थक बनाने के लिए उन्हें सुरक्षित, स्वस्थ, स्वच्छ और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि किसी बच्चे को केवल इसलिए असुविधाजनक अथवा असुरक्षित परिस्थितियों में पढ़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वह सरकारी विद्यालय में अध्ययन कर रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी समान अवसर और बेहतर शैक्षिक वातावरण मिलना चाहिए।
अब खंड शिक्षा अधिकारियों की जिम्मेदारी
बीएसए द्वारा जारी निर्देशों के बाद अब संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो गई है। उन्हें विद्यालयों में इन व्यवस्थाओं की स्थिति का निरीक्षण कर आवश्यक कमियों को चिन्हित कराने और सुधार सुनिश्चित कराने के साथ ही कार्रवाई की आख्या जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में उपलब्ध करानी होगी। प्रशासन की इस कार्रवाई से उम्मीद जगी है कि जनपद के सरकारी विद्यालयों की वास्तविक स्थिति का धरातलीय निरीक्षण होगा और पेयजल, शौचालय, भवन, फर्नीचर, शिक्षक, बिजली, खेल मैदान सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कमियों को दूर करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
एडीएचआर ने प्रशासन की कार्रवाई का किया स्वागत
एडीएचआर के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय ने जिला प्रशासन और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा ज्ञापन का संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू किए जाने का स्वागत किया।न उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी विभाग या अधिकारी की आलोचना करना नहीं, बल्कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को उनका उचित अधिकार दिलाना है। प्रत्येक बच्चे को स्वच्छ पानी, सुरक्षित भवन, स्वच्छ शौचालय, पर्याप्त शिक्षक, फर्नीचर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अधिकारियों के निर्देश केवल सरकारी पत्रों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका असर विद्यालयों में धरातल पर दिखाई दे। प्रवीन वार्ष्णेय ने कहा कि एडीएचआर आगे भी जनहित में सरकारी विद्यालयों की व्यवस्थाओं की निगरानी करता रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों के समक्ष समस्याओं को उठाता रहेगा। सरकारी स्कूलों में बुनियादी एवं गुणवत्तापूर्ण सुधार होने तक संगठन की यह मुहिम जारी रहेगी।
विद्यालयों में बदलाव धरातल पर दिखना चाहिए
एडीएचआर के ज्ञापन के बाद जिला प्रशासन द्वारा बीएसए को और बीएसए द्वारा सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को जारी किए गए निर्देशों को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि विद्यालयों में पेयजल, शौचालय, भवन, फर्नीचर, शिक्षक, बिजली, खेल मैदान और अन्य सुविधाओं को लेकर सामने आने वाली कमियों का समाधान कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से किया जाता है। एडीएचआर का स्पष्ट संदेश है कि कोई भी सरकारी विद्यालय बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहे और कोई भी बच्चा केवल गरीबी अथवा सरकारी विद्यालय में पढ़ने के कारण गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित एवं गरिमापूर्ण शिक्षा से वंचित न हो।













