
हाथरस 30 अगस्त। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बिजली विभाग के खिलाफ फैसला सुनाते हुए किसान पर लगाए गए 4,50,583 रुपये के प्रोविजनल असेसमेंट को रद्द कर दिया। आयोग ने मानसिक उत्पीड़न के लिए बिजली विभाग को 50 हजार रुपये मुआवजा और 25 हजार रुपये वाद खर्च के रूप में देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही तत्कालीन अधिशासी अभियंता अखिलेश कुमार समेत संबंधित अधिकारियों पर रिश्वत मांगने के आरोपों की विभागीय जांच कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। आयोग ने आदेश का पालन 30 दिन के भीतर करने को कहा है। मामला हाथरस जिले के सुसायत कलां गांव निवासी पीयूष अग्रवाल के परिवार से जुड़ा है। पीयूष अग्रवाल के दिवंगत पिता महेश अग्रवाल ने वर्ष 2018 में अपनी कृषि भूमि पर 10 बीएचपी क्षमता का निजी ट्यूबवेल संचालित करने के लिए बिजली कनेक्शन का आवेदन किया था। इसके लिए उन्होंने करीब तीन लाख रुपये की एस्टीमेट राशि विभाग में जमा कराई थी। विभाग की ओर से मौके पर डबल पोल और ट्रांसफार्मर भी स्थापित कर दिया गया, लेकिन बिजली लाइन चालू नहीं की गई।
शिकायत के अनुसार, तत्कालीन अधिशासी अभियंता अखिलेश कुमार और जूनियर इंजीनियर ने कनेक्शन चालू करने के नाम पर कथित तौर पर एक-एक लाख रुपये रिश्वत की मांग की। महेश अग्रवाल ने रकम देने से इनकार कर दिया। इसके बाद आरोप है कि 5 मार्च 2018 को चेकिंग के नाम पर बिजली चोरी की कार्रवाई करते हुए उनके खिलाफ 4,50,583 रुपये का प्रोविजनल असेसमेंट जारी कर दिया गया। महेश अग्रवाल ने इस कार्रवाई के खिलाफ विभागीय अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन विवाद का समाधान नहीं हो सका। इसी दौरान 7 दिसंबर 2020 को महेश अग्रवाल का निधन हो गया। इसके बाद उनके बेटे पीयूष अग्रवाल ने मामले में कानूनी लड़ाई जारी रखी और उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष हसनेन कुरैशी, सदस्य आलोक उपाध्याय और पूर्णिमा सिंह राजपूत की पीठ ने पाया कि चेकिंग के दौरान मौके की वीडियोग्राफी नहीं कराई गई थी। साथ ही उपभोक्ता को अपना पक्ष रखने के लिए उचित अवसर भी नहीं दिया गया। आयोग ने इन परिस्थितियों को देखते हुए प्रोविजनल असेसमेंट को अवैध माना और 4,50,583 रुपये का पूरा असेसमेंट रद्द कर दिया। आयोग ने मानसिक उत्पीड़न के लिए 50 हजार रुपये और मुकदमे में हुए खर्च के लिए 25 हजार रुपये देने का आदेश दिया है। वहीं, रिश्वत मांगने के लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन एक्सईएन अखिलेश कुमार सहित संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग के इस फैसले से लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे पीयूष अग्रवाल को बड़ी राहत मिली है।













