
हाथरस 27 अगस्त। आशु कवि अनिल बौहरे की परिकल्पना पर तैयार पुस्तक ‘बधाई है बधाई तथा शुभकामनाएं’ के आवरण का अनावरण अपना घर आश्रम में अनूठे अंदाज में कराया गया। पुस्तक में ब्रज क्षेत्र के करीब 350 कवियों तथा हाथरस के करीब 400 काव्य मंच प्रेमियों की जन्मतिथियों को निर्देशिका के रूप में संकलित किया गया है। पुस्तक के आवरण का अनावरण उन प्रभुओं के कर-कमलों से कराया गया, जिन्हें अपनी जन्मतिथि तो दूर, अपने घर-परिवार के बारे में भी जानकारी नहीं है। इस पहल के माध्यम से अनिल बौहरे ने समाज को संवेदनशीलता और मानवीय सरोकार का सुंदर संदेश देने का प्रयास किया। कार्यक्रम का संचालन संस्कार भारती के अध्यक्ष चेतन उपाध्याय ने किया, जबकि अध्यक्षता घुमक्कड़ कवि गाफिल स्वामी ने की। इस दौरान कवियों ने अपना घर आश्रम में रह रहे प्रभुओं को कविताएं सुनाईं। कविताओं की प्रस्तुति पर आश्रमवासी प्रभुओं ने तालियां बजाकर कवियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के अंत में आशु कवि अनिल बौहरे ने कहा कि जिन लोगों को अपनी जन्मतिथि तक ज्ञात नहीं है, उन्हीं के हाथों जन्मतिथियों से जुड़ी पुस्तक के आवरण का अनावरण कराया जाना अपने आप में एक सार्थक और संदेशवाहक पहल है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन साहित्य के साथ मानवीय संवेदनाओं को जोड़ने का प्रयास है।












