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हाथरस 26 अगस्त। बूलगढ़ी कांड के पीड़ित परिवार के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ का ताजा फैसला वर्षों से चली आ रही पुनर्वास और रोजगार की मांग के बीच नई उम्मीद लेकर आया है। परिवार के मृतका के बड़े भाई सतेंद्र का कहना है कि परिवार लंबे समय से हाथरस से बाहर बसाए जाने की मांग कर रहा है और अब उम्मीद है कि उसे नोएडा या गाजियाबाद में नया ठिकाना मिल सकेगा। परिवार चाहता है कि उसे ऐसी जगह बसाया जाए, जहां रिश्तेदारों का साथ और सामाजिक सहयोग मिल सके, बच्चों की पढ़ाई के बेहतर अवसर उपलब्ध हों तथा परिवार के सदस्यों के लिए रोजगार के रास्ते खुलें। परिवार का कहना है कि छह वर्षों से जिस तरह सुरक्षा घेरे में जीवन बीत रहा है, उससे बाहर निकलकर वह अब सामान्य सामाजिक माहौल में सम्मानपूर्वक जिंदगी शुरू करना चाहता है।

परिवार की मांग केवल एक मकान उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। घटना के बाद से बूलगढ़ी स्थित परिवार के घर के आसपास लगातार कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही है। नवंबर 2020 में परिवार की सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ के करीब 80 जवानों की एक कंपनी तैनात की गई थी। घर के आसपास सुरक्षा मोर्चे बनाए गए और आने-जाने वालों पर निगरानी की व्यवस्था रही। परिवार का कहना है कि सुरक्षा की जरूरत अपनी जगह है, लेकिन लगातार सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी, आने-जाने पर निगरानी और रिश्तेदारों से दूरी ने धीरे-धीरे उनके सामान्य जीवन को प्रभावित किया है। अब परिवार ऐसा जीवन चाहता है जिसमें हर समय पहरे और भय का माहौल न हो, बल्कि वह समाज के बीच सामान्य तरीके से रह सके। सतेंद्र के मुताबिक परिवार ने अदालत के समक्ष नोएडा और गाजियाबाद में पुनर्वास को प्राथमिकता दी थी। उनका कहना है कि कासगंज, एटा और अलीगढ़ जैसे जिले हाथरस के अपेक्षाकृत नजदीक हैं, इसलिए परिवार वहां बसना नहीं चाहता। इसके विपरीत नोएडा और गाजियाबाद में परिवार के रिश्तेदार रहते हैं, जिससे नए स्थान पर बसने के बाद उन्हें सामाजिक और पारिवारिक सहयोग मिलने की उम्मीद है। परिवार का मानना है कि इन शहरों में बच्चों की शिक्षा और परिवार के सदस्यों के रोजगार के लिए भी बेहतर अवसर मिल सकते हैं।

अब आदेश के अमल का इंतजार

छह साल से सुरक्षा, पुनर्वास और रोजगार की मांग कर रहे परिवार के लिए हाईकोर्ट का आदेश एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। सतेंद्र का कहना है कि अब परिवार चाहता है कि पुनर्वास की प्रक्रिया केवल सरकारी कागजों और आश्वासनों तक सीमित न रहे, बल्कि उसे वास्तव में नोएडा या गाजियाबाद में बसाने की कार्रवाई की जाए। परिवार की नजर अब सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है। परिवार का कहना है कि हाईकोर्ट ने पुनर्वास के बाद परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने का भी निर्देश दिया है, इसलिए सरकार को इस दिशा में भी जल्द कदम उठाना चाहिए। परिवार की एक प्रमुख मांग सरकारी नौकरी की भी है। सतेंद्र का कहना है कि पूर्व में सरकार की ओर से परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का वादा किया गया था। अब परिवार चाहता है कि इस वादे को जल्द पूरा किया जाए। परिवार का कहना है कि पुनर्वास के साथ रोजगार मिलने से वह आर्थिक रूप से भी अपने पैरों पर खड़ा हो सकेगा और नए स्थान पर जीवन की नई शुरुआत करना आसान होगा।

सुरक्षा घेरे में बीते छह साल

बूलगढ़ी गांव में 14 सितंबर 2020 को 19 वर्षीय युवती के साथ हुई घटना के बाद परिवार की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। उपचार के दौरान 29 सितंबर को दिल्ली में युवती की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद मामला देशभर में चर्चा में आया। परिवार की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सीआरपीएफ ने भी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद से परिवार के घर और आसपास लगातार सुरक्षा व्यवस्था बनी रही। परिवार के लिए यह सुरक्षा शुरुआत में जरूरी सहारा थी, लेकिन समय बीतने के साथ यही व्यवस्था सामान्य जीवन में बाधा बनती चली गई। रिश्तेदारों से दूरी, आने-जाने वालों की निगरानी और हर समय सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी के बीच परिवार अब अपने जीवन को सामान्य पटरी पर लाना चाहता है। परिवार का कहना है कि वह सुरक्षा से समझौता नहीं चाहता, लेकिन ऐसी जगह बसना चाहता है जहां उसे सुरक्षा के साथ स्वतंत्र और सामान्य सामाजिक जीवन भी मिल सके। हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद परिवार को उम्मीद है कि वर्षों से लंबित पुनर्वास, रोजगार और सामान्य जीवन की उनकी मांग अब आगे बढ़ेगी। परिवार की नजर सरकार की कार्रवाई पर है और वह चाहता है कि नोएडा या गाजियाबाद में पुनर्वास, एक सदस्य को रोजगार तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं को लेकर जल्द ठोस निर्णय लिया जाए, ताकि छह वर्षों से चला आ रहा इंतजार समाप्त हो और परिवार एक नई शुरुआत कर सके।

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