सिकन्दराराऊ 24 अगस्त। दिल्ली के जंतर-मंतर पर रिजर्वेशन रिफॉर्म (आरक्षण सुधार) को लेकर चल रहे आंदोलन में शामिल होने जा रहे राष्ट्रीय विप्र एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मित्रेश चतुर्वेदी को पुलिस प्रशासन ने उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर दिया। उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात कर उनकी आवाजाही पर रोक लगा दी गई। पुलिस प्रशासन की इस कार्रवाई पर राष्ट्रीय विप्र एकता मंच एवं सहयोगी संगठनों ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि देशभर में सवर्ण समाज के अधिकारों, न्याय एवं आरक्षण सुधार की मांग को लेकर आंदोलन चलाया जा रहा है। इसी क्रम में दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित महाप्रदर्शन में शांतिपूर्ण भागीदारी के लिए जा रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष को नजरबंद करना उचित नहीं है।
यूजीसी के नए कानून को बताया ‘काला कानून’
हाउस अरेस्ट किए जाने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष मित्रेश चतुर्वेदी ने प्रशासन की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पुलिस की लाठियों और नजरबंदी के दम पर लोकतांत्रिक आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि देशभर में रिजर्वेशन रिफॉर्म की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है और इसी से घबराकर इस प्रकार की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यूजीसी के नए कानून को सवर्ण समाज के खिलाफ बताते हुए ‘काला कानून’ करार दिया और कहा कि इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यूजीसी के नियमों तथा वर्तमान आरक्षण नीति पर दोबारा गहराई से विचार करने की मांग उठाई।
कार्रवाई के विरोध में जताया रोष
राष्ट्रीय विप्र एकता मंच के पदाधिकारियों एवं विभिन्न सवर्ण संगठनों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष की नजरबंदी की तीखी आलोचना की। संगठन का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने से रोकना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का उल्लंघन है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि राष्ट्रीय अध्यक्ष की नजरबंदी समाप्त नहीं की गई और उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने की अनुमति नहीं दी गई, तो विप्र समाज एवं विभिन्न सवर्ण संगठन प्रशासन की इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध करेंगे। विप्र एकता मंच ने देश एवं प्रदेश के सवर्ण समाज, युवाओं और कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील करते हुए आरक्षण सुधार और यूजीसी से जुड़े मुद्दों को लेकर चलाए जा रहे आंदोलन को और तेज करने का आह्वान किया।












