
हाथरस 18 अगस्त। देशभक्त बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित अमर गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिलने पर देशभर में उत्साह और गौरव का माहौल है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम’ क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणा और देशभक्ति का मंत्र बना रहा। यह गीत आज भी देशवासियों में मातृभूमि के प्रति सम्मान, राष्ट्रीय गौरव और एकता की भावना जागृत करता है। ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक माना जाता है। इसमें भारत की समृद्ध प्रकृति, हरियाली, फसलों, नदियों और मातृशक्ति की वंदना के माध्यम से देश की मिट्टी से गहरे जुड़ाव को अभिव्यक्त किया गया है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस गीत ने लोगों में राष्ट्रप्रेम और अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डाक टिकट संग्रहकर्ता शैलेंद्र सर्राफ ने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत के रूप में मिले सम्मान पर खुशी व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि उनके व्यक्तिगत संग्रह में ‘वंदे मातरम’ पर जारी लगभग 50 वर्ष पुरानी एक ऐतिहासिक डाक टिकट भी सुरक्षित है, जिसे वह देशभक्ति और गर्व की भावना के साथ संजोकर रखे हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह डाक टिकट तिरंगे के रंगों से सुसज्जित है और इस पर ‘वंदे मातरम’ गीत की प्रथम छह पंक्तियां अंकित हैं। टिकट के ऊपरी हिस्से में ‘वंदे मातरम’ लिखा हुआ है। उनके अनुसार, यह डाक टिकट स्वतंत्रता सेनानियों, अमर शहीदों और देशभक्तों के सम्मान का प्रतीक होने के साथ-साथ देश के गौरवशाली इतिहास की महत्वपूर्ण धरोहर भी है। शैलेंद्र सर्राफ ने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक डाक टिकट केवल संग्रह की वस्तुएं नहीं होते, बल्कि वे देश के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय भावनाओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम भी हैं। उन्होंने कहा कि इस डाक टिकट को देखने मात्र से शरीर में देशभक्ति का जज्बा भर जाता है और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की याद ताजा हो जाती है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रप्रेम की भावना का प्रतीक है। इस ऐतिहासिक गीत से जुड़ी डाक टिकट उनके संग्रह में सुरक्षित रहना उनके लिए गर्व की बात है।












