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सासनी 08 अगस्त। कस्बे के रामलीला मैदान में चल रही श्रीराम कथा के दौरान कथा व्यास परम पूज्य श्री अतुल कृष्ण भारद्वाज महाराज ने श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाना ही सच्ची भक्ति है। उन्होंने श्रद्धालुओं को भरत जी के महान त्याग और केवट की अनन्य भक्ति से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। कथा व्यास ने कहा कि भगवान राम और भरत ने कभी संपत्ति का बंटवारा नहीं किया, बल्कि एक-दूसरे की विपत्तियों को बांटा। उन्होंने भरत जी को प्रेमरूपी अमृत का सागर बताते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम ने उन्हें ‘रघुवंश का हंस’ कहा है। चित्रकूट से भगवान श्रीराम की चरण पादुकाएं लेकर लौटे भरत जी ने उन्हें सिंहासन पर विराजमान कर रामराज्य की स्थापना की और त्याग एवं भाईचारे की अद्भुत मिसाल पेश की। कथा के दौरान गंगा पार कराने के प्रसंग का वर्णन करते हुए व्यास जी ने केवट की अनन्य भक्ति और समर्पण को भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि केवट ने अत्यंत विनम्रता और प्रेम के साथ प्रभु श्रीराम के सामने शर्त रखी कि उनके चरण धोने के बाद ही वह नाव चलाएगा। केवट की इस पावन भक्ति और भाव के आगे भगवान श्रीराम भी उसकी बात स्वीकार करने के लिए विवश हुए। चरण पखारने के इस पावन अवसर से केवट ही नहीं, बल्कि उसकी सात पीढ़ियों के तरने की बात कथा में कही गई। इस अवसर पर पूर्व प्रांत प्रचारक दिनेश शर्मा ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और स्वामी विवेकानंद के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि महानता उम्र या पद से नहीं, बल्कि गुण, योग्यता और संघर्ष से प्राप्त होती है। विषम परिस्थितियों में आने वाली कठिनाइयों का सामना कर उनसे सीख लेना ही सफलता और श्रेष्ठता की दिशा में पहला कदम है। कथा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यदि मनुष्य सच्चे मन से भगवान की भक्ति करे तो उसे ईश्वर का साक्षात्कार अवश्य प्राप्त होता है। त्याग और भक्ति जीवन के उत्कृष्ट गुण हैं, जो मनुष्य को भवसागर से पार लगाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इस अवसर पर मुख्य यजमान विजय कुमार शर्मा, आचार्य पं. खगेन्द्र शास्त्री, अभिनाश तिवारी, हरेंद्र सिंह, संतोष वार्ष्णेय, विक्रम सिंह, मदन गोपाल रावत, अजय रावत, नरेंद्र शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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