
हाथरस 08 अगस्त । श्री अग्रवाल सभा की चुनाव प्रक्रिया को लेकर सदस्यों के बीच विवाद सामने आया है। पूर्व अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल एवं सुरेश चंद्र अग्रवाल बर्तन समेत कई सदस्यों ने चुनाव प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और मनमानी का आरोप लगाते हुए सभा के महामंत्री विनोद कुमार अग्रवाल को विरोध पत्र सौंपा है। शिकायतकर्ताओं ने वर्तमान चुनाव समिति को भंग कर नई बैठक बुलाने और निष्पक्ष एवं मर्यादापूर्ण तरीके से चुनाव कराने की मांग की है। वहीं, चुनाव अधिकारियों ने लगाए गए आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है।
नामांकन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि चुनाव नियमावली में नामांकन दाखिल करने के लिए कोई निर्धारित समय स्पष्ट रूप से तय नहीं किया गया है। इसके अलावा, नाम वापसी की स्थिति में नियमानुसार नामांकन शुल्क वापस किए जाने की व्यवस्था का भी पालन नहीं किया जा रहा है। शिकायत के अनुसार, 5 अगस्त 2026 नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि निर्धारित थी। आरोप है कि निर्धारित अंतिम तिथि के बाद भी 6 अगस्त को नामांकन लिए गए। शिकायतकर्ताओं ने इसे चुनाव नियमों का उल्लंघन बताते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि 5 अगस्त को निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी नामांकन की अंतिम सूची जारी नहीं की गई। बाद में उन्हें जानकारी दी गई कि 5 अगस्त की रात करीब 10 बजे चार नामांकन फॉर्म घर पर प्राप्त हुए थे। शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाया कि यदि नामांकन की अंतिम तिथि 5 अगस्त थी तो देर रात घर पर प्राप्त हुए नामांकन को किस नियम के तहत स्वीकार किया गया। इसके बाद 6 अगस्त को शाम चार बजे नामांकन सूची जारी किए जाने को लेकर भी शिकायतकर्ताओं ने आपत्ति जताई है।
समाज में मतभेद बढ़ने का लगाया आरोप
विरोध पत्र में सदस्यों ने आरोप लगाया कि चुनाव अधिकारियों के कथित मनमाने रवैये के कारण समाज में मतभेद और विघटन की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने मांग की है कि सभा की बैठक बुलाकर पूरे मामले पर चर्चा की जाए, चुनाव प्रक्रिया में कथित मनमानी पर रोक लगाई जाए और वर्तमान चुनाव समिति को भंग कर नई व्यवस्था के तहत निष्पक्ष चुनाव कराया जाए। विरोध पत्र में मुकेश गर्ग, जितेंद्र कुमार गोयल, विष्णु कुमार, निपुण कुमार पोद्दार, सुरेंद्र कुमार हरिशंकर, प्रहलाद अग्रवाल कसेरे, मदनलाल कसेरे, विनोद कुमार, राकेश, गौरव, रूपकिशोर, अजय और अनुज अग्रवाल समेत कई सदस्यों के नाम शामिल बताए गए हैं।
चुनाव अधिकारियों ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
वहीं, चुनाव अधिकारी देवेंद्र गोयल और दीपेश अग्रवाल ने शिकायतकर्ताओं के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उनका कहना है कि अग्रवाल सभा की बैठक में चुनाव कराने के लिए सर्वसम्मति से पांच लोगों को चुनाव अधिकारी बनाया गया था। उन्हें चुनाव प्रक्रिया अपने हिसाब से संचालित करने के लिए स्वतंत्रता दी गई थी। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, समिति गठित होने के कुछ दिन बाद चुनाव की नियमावली जारी की गई थी, जिसमें स्पष्ट रूप से 5 अगस्त को नामांकन की अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी। हालांकि, नामांकन दाखिल करने के लिए कोई निश्चित समय सीमा निर्धारित नहीं की गई थी। चुनाव अधिकारी देवेंद्र गोयल और दीपेश अग्रवाल का कहना है कि यह समाज का चुनाव था, कोई सरकारी कार्यालय नहीं, इसलिए यदि कोई सदस्य 5 अगस्त को देर रात भी नामांकन फॉर्म लेकर उनके घर पहुंचता है तो उसे स्वीकार करना चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा था। उन्होंने 6 अगस्त को नामांकन लिए जाने के आरोप को भी सिरे से खारिज किया। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, 6 अगस्त को कोई नामांकन स्वीकार नहीं किया गया, बल्कि उस दिन प्राप्त नामांकन पत्रों की जांच की गई। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसी दिन शाम चार बजे नामांकन सूची जारी कर दी गई। अब श्री अग्रवाल सभा के चुनाव को लेकर उठे इन सवालों के बीच सभी की नजरें सभा की आगामी बैठक और चुनाव प्रक्रिया को लेकर होने वाले अगले निर्णय पर टिकी हैं।






