मथुरा 06 अगस्त। केडी विश्वविद्यालय के चिकित्सा शिक्षा संस्थान के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के छात्र-छात्राओं ने विश्व स्तनपान सप्ताह के समापन अवसर पर रंगोली, पोस्टर और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से महिलाओं एवं तीमारदारों को स्तनपान के महत्व और इसके फायदों के प्रति जागरूक किया। छात्र-छात्राओं ने संदेशपरक प्रस्तुतियों के जरिए माताओं को नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए मां के दूध की उपयोगिता बताई। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी, कुलसचिव डॉ. विकास कुमार अग्रवाल, कॉलेज के डीन एवं प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका तथा चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गगनदीप सिंह ने छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियों की सराहना की और प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी ने कहा कि शिशु के लिए मां का दूध सम्पूर्ण आहार होता है। इसमें बच्चे के विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्व, विटामिन और मिनरल उचित मात्रा में मौजूद होते हैं। वहीं डीन एवं प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका ने कहा कि मां का दूध शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। इसमें मौजूद एंटीबॉडीज बच्चे को संक्रमण और विभिन्न बीमारियों से लड़ने में मदद करती हैं।
शिशु रोग विभाग, महिला एवं प्रसूति रोग विभाग तथा सामुदायिक चिकित्सा विभाग की ओर से आयोजित विश्व स्तनपान सप्ताह का समापन मेडिकल छात्र-छात्राओं के नुक्कड़ नाटक के साथ हुआ। छात्र-छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्तनपान के महत्व और इसके फायदों की जानकारी दी। साथ ही ऐसी गलत परम्पराओं पर भी कटाक्ष किया गया, जिनका शिशु के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से भीड़भाड़ वाले स्थानों पर माताएं अपने बच्चों को किस प्रकार स्तनपान करा सकती हैं, इसकी जानकारी भी दी गई। इसके अलावा नवजात शिशुओं को शहद अथवा बोतल से दूध पिलाने के संभावित दुष्परिणामों के प्रति भी जागरूक किया गया। महिला एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. वी.पी. पांडेय ने स्तनपान को समाज के बेहतर भविष्य में एक महत्वपूर्ण निवेश बताया। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य प्रत्येक मां को स्तनपान के संबंध में उचित जानकारी उपलब्ध कराना, प्रशिक्षित सलाहकारों से मदद दिलाना और ऐसा पारिवारिक, चिकित्सीय एवं कार्यस्थल वातावरण तैयार करना है, जो माताओं को स्तनपान के लिए प्रोत्साहित करे। सामुदायिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. गगनदीप कौर ने कहा कि स्तनपान करने वाले बच्चों में दस्त, निमोनिया और सेप्सिस जैसी बीमारियों का खतरा कम रहता है। उन्होंने स्तनपान से माताओं को होने वाले स्वास्थ्य लाभों की भी जानकारी दी।
शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संध्या लता ने कहा कि स्तनपान केवल शिशु के पोषण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के दीर्घकालिक स्वास्थ्य में निवेश है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाला खर्च कम करने, बच्चों के बेहतर बौद्धिक विकास और भावी पीढ़ी को स्वस्थ शुरुआत देने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि मां का दूध पीने वाले बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है। उन्होंने माताओं से नवजात शिशुओं को पर्याप्त अवधि तक स्तनपान कराने की अपील की। विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों की कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी, डीन एवं प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गगनदीप सिंह, परीक्षा नियंत्रक डॉ. अम्बरीश कुमार, महिला एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. वी.पी. पांडेय, सामुदायिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. गगनदीप कौर, शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संध्या लता, मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू पांडेय, क्षय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. एस.के. बंसल, डॉ. श्याम बिहारी शर्मा सहित अन्य चिकित्सकों ने सराहना की। इस अवसर पर डॉ. बिश्वाविनोद सानफुई, डॉ. स्वेता सिंह, डॉ. शुभ्रा दुबे, डॉ. निखिल थोराट और डॉ. शिवानी बिनवाल आदि ने छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन किया।











