
हाथरस 01 अगस्त। प्रसव के लिए भले ही बड़ी संख्या में लोग निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हों, लेकिन गंभीर बीमार और कमजोर नवजात शिशुओं के उपचार के लिए सरकारी अस्पताल पर भरोसा बढ़ रहा है। जिला महिला अस्पताल स्थित स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) के वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार एसएनसीयू में भर्ती कुल 1,290 नवजातों में 892 यानी 69 प्रतिशत ऐसे बच्चे थे, जिनका जन्म निजी या अन्य अस्पतालों में हुआ था, जबकि 398 बच्चे यानी 31 प्रतिशत जिला महिला अस्पताल में जन्मे थे। उपचार के बाद 919 नवजात यानी करीब 71 प्रतिशत बच्चे स्वस्थ होकर अपने घर लौटे, जबकि बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए 232 बच्चों को अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। इलाज के दौरान 39 नवजातों की मृत्यु हुई, जबकि 91 बच्चों को परिजन अपनी इच्छा से चिकित्सकीय सलाह के विपरीत अस्पताल से ले गए। कुल भर्ती बच्चों में 796 लड़के और 494 लड़कियां शामिल थीं। जिला महिला अस्पताल का 12 बेड का एसएनसीयू हर माह करीब 100 से 120 नवजातों को भर्ती कर उपचार उपलब्ध करा रहा है। निजी अस्पतालों में एसएनसीयू का खर्च बीमारी की गंभीरता के अनुसार प्रतिदिन करीब पांच से 10 हजार रुपये तक पहुंच जाता है, जबकि गंभीर नवजातों को भर्ती करने में कई बार निजी अस्पतालों में भी चिकित्सकीय स्तर पर झिझक देखने को मिलती है। ऐसे में सरकारी एसएनसीयू जरूरतमंद परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन रहा है। हाल ही में मुरसान निवासी हेमा के 885 ग्राम वजन वाले नवजात बेटे को निजी अस्पताल से एसएनसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है। वहीं शहर निवासी डॉली के 1,755 ग्राम वजन वाले कमजोर नवजात को भी एसएनसीयू में भर्ती किया गया था, जिसे स्वस्थ होने के बाद शुक्रवार को छुट्टी दे दी गई। सासनी निवासी सौरभ की पत्नी द्वारा जन्मी बच्ची जन्म के तुरंत बाद नहीं रोई और उसकी गतिविधियां भी कम थीं, जिसके चलते उसे तत्काल एसएनसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार एसएनसीयू में कम वजन, जन्म के बाद न रोने और संक्रमण से प्रभावित नवजातों की संख्या अधिक रहती है। बाहर के अस्पतालों से आने वाले नवजातों की संख्या लगातार अधिक है और करीब 18 प्रतिशत बच्चों को बेहतर उपचार के लिए रेफर किया जाता है। अधिकारियों के अनुसार अधिकांश नवजात उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं। बढ़ती जरूरत को देखते हुए एसएनसीयू के विस्तार के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।










