
हाथरस 01 अगस्त। शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों की विभिन्न समस्याओं और अधिकारों की रक्षा की मांग को लेकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। संघ ने 31 जुलाई के कार्यालय आदेश के तहत लागू की जा रही ऑनलाइन डिजिटल उपस्थिति (डिजिटल अटेंडेंस) की प्रक्रिया का विरोध करते हुए इसे तत्काल प्रभाव से स्थगित करने की मांग की। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि 16 जुलाई 2024 को उत्तर प्रदेश शासन की ओर से यह निर्णय लिया गया था कि शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए गठित उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने तक ऑनलाइन डिजिटल उपस्थिति को अग्रिम आदेशों तक स्थगित रखा जाएगा। ऐसे में जिला स्तर पर डिजिटल अटेंडेंस लागू किया जाना शासन के निर्देशों के विपरीत है। संघ ने कहा कि जब तक शासन स्तर से पूरे प्रदेश के लिए स्पष्ट, सर्वसम्मत और एकसमान नीति जारी नहीं होती, तब तक केवल जनपद में शिक्षकों पर इसे लागू करना उचित नहीं है।
शिक्षक संघ ने डिजिटल उपस्थिति लागू करने में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का भी मुद्दा उठाया। पदाधिकारियों के अनुसार बेसिक शिक्षा से जुड़े शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को नेटवर्क कनेक्टिविटी, आधारभूत ढांचागत सुविधाओं और अन्य तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पर्याप्त तैयारियों और प्रदेशव्यापी स्पष्ट नीति के बिना डिजिटल अटेंडेंस लागू करना शिक्षकों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। संघ ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से मांग की कि 31 जुलाई 2026 के कार्यालय आदेश के क्रियान्वयन को शिक्षक हित और जनहित में तत्काल स्थगित किया जाए, जिससे विद्यालयों में पठन-पाठन का माहौल सुचारू रूप से बना रहे। ज्ञापन देने वालों में संतोष कुमार शर्मा, योगेंद्र कुमार शर्मा, वीरेंद्र कुमार सिंह, शशि कुलश्रेष्ठ, गोविंद रावत, अरुण शर्मा, शैलेंद्र चौहान, कृष्णकांत शर्मा, लाल बहादुर, कुलदीप सिंह, नरेश मीणा, सचिन शर्मा, अमित पचौरी, नितेश वार्ष्णेय, संतोष चौधरी, कन्हैया लाल शर्मा, गिरेंद्र सिंह, गौरव पचौरी, भगवान दास यादव, अमित शर्मा, जीतू शर्मा, प्रभाकर शर्मा, राजेश कुमार, प्रेमवीर सिंह, बीपी गौतम, संजीव शर्मा, मणिभूषण शर्मा, सुनील कुमार सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे। संघ के जिलाध्यक्ष सुरेश कुमार शर्मा ने कहा कि शिक्षक किसी भी तकनीक के विरोधी नहीं हैं, लेकिन जब तक प्रदेश सरकार शिक्षकों की समस्याओं और विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर एकसमान नीति तैयार नहीं करती, तब तक हाथरस में जबरन डिजिटल उपस्थिति लागू करने के किसी भी प्रयास का विरोध किया जाएगा। उन्होंने शासन के निर्देशों का सम्मान करते हुए 31 जुलाई के आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की।










