मथुरा 01 अगस्त। नशा केवल एक व्यक्ति के जीवन को प्रभावित नहीं करता, बल्कि पूरे परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर भी इसका गंभीर असर पड़ता है। चिकित्सक स्वस्थ राष्ट्र के महत्वपूर्ण प्रहरी हैं और अपने विचारों के माध्यम से आमजन में नशामुक्ति की चेतना जागृत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यह बात केडी विश्वविद्यालय के चिकित्सा शिक्षा संस्थान केडी मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के मनोचिकित्सा विभाग द्वारा आयोजित नशामुक्ति जागरूकता अभियान के समापन समारोह में अतिथियों ने मेडिकल छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कही। समापन कार्यक्रम का शुभारंभ सीओ छाता भूषण वर्मा, ड्रग इंस्पेक्टर मथुरा प्रेम प्रकाश पाठक, केडी विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण अग्रवाल, कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी, उप-कुलपति डॉ. गौरव सिंह, कुलसचिव डॉ. विकास कुमार अग्रवाल, डीन एवं प्राचार्य डॉ. आर के अशोका तथा अभियान की समन्वयक डॉ. श्वेता सिंह ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया। अतिथियों और सभी विभागाध्यक्षों का स्वागत डॉ. गौरव सिंह एवं डॉ. श्वेता सिंह ने किया।
अभियान की समन्वयक डॉ. श्वेता सिंह ने स्वागत उद्बोधन में बताया कि जागरूकता अभियान के दौरान मेडिकल छात्र-छात्राओं ने नाटक, कला, ज्ञान, रचनात्मकता, सार्वजनिक भाषण और कानूनी जागरूकता जैसे विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से नशामुक्ति का संदेश दिया। विद्यार्थियों ने लोगों से तम्बाकू, सिगरेट और अन्य मादक पदार्थों से दूर रहने की अपील भी की। विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता और उपविजेता छात्र-छात्राओं को अतिथियों ने ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। केडी विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण अग्रवाल ने छात्र-छात्राओं से अच्छे चिकित्सक बनकर स्वस्थ समाज की सेवा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में आने वाले विद्यार्थियों की जिम्मेदारी केवल मरीजों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समाज को स्वस्थ और जागरूक बनाने में भी योगदान देना चाहिए।
सीओ छाता भूषण वर्मा ने कहा कि समाज को नशामुक्त बनाने में मेडिकल छात्र-छात्राओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। पुलिस का उद्देश्य केवल कानून का पालन कराना ही नहीं, बल्कि जागरूकता के माध्यम से स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त वातावरण तैयार करना भी है। उन्होंने सभी से स्वयं नशे से दूर रहने और दूसरों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया। कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी ने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि नशामुक्ति का यह अभियान निरंतर चलना चाहिए, ताकि समाज में इसका सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे। उन्होंने विद्यार्थियों से ऐसा जागरूकता संदेश देने का आह्वान किया, जो लोगों के दिमाग तक ही नहीं, बल्कि उनकी अंतरात्मा तक पहुंचे। ड्रग इंस्पेक्टर मथुरा प्रेम प्रकाश पाठक ने नशे के कारण समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति और समाज दोनों को अंदर से खोखला कर देता है। इसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई, मेडिकल स्टोरों पर प्रभावी निगरानी और व्यापक जन-जागरूकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि बिना डॉक्टर की पर्ची के प्रतिबंधित अथवा नशीली दवाओं की बिक्री मेडिकल स्टोरों पर नहीं होनी चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विदुषी मक्कर ने किया, जबकि आभार डॉ. हेमंत शांडिल्य ने व्यक्त किया।










