
हाथरस 30 जुलाई। हाथरस जंक्शन क्षेत्र के गांव बरौली में बारिश के दौरान अंतिम संस्कार के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव एक बार फिर उजागर हो गया। टिनशेड और पक्के चबूतरे के अभाव में परिजनों को शव का अंतिम संस्कार करने के लिए करीब एक घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान चिता और शव को बारिश से बचाने के लिए ग्रामीणों ने तिरपाल का सहारा लिया और कई लोग तेज बारिश में भीगते हुए तिरपाल को हाथों से पकड़े खड़े रहे। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के श्मशान घाटों की बदहाल स्थिति चर्चा का विषय बन गई है।
जानकारी के अनुसार, बरौली निवासी वीरेंद्र सिंह (45) पुत्र हगुलाल सिंह का अलीगढ़ के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया था। 28 जुलाई को परिजन उनका शव गांव लेकर पहुंचे और दोपहर में अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पहुंचे। इसी दौरान तेज बारिश शुरू हो गई। श्मशान घाट पर न टिनशेड था और न ही पक्का चबूतरा, जिससे पूरे परिसर में कीचड़ और जलभराव हो गया। मजबूरी में ग्रामीणों ने तिरपाल तानकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों ने विकास कार्यों पर सवाल उठाए। ग्राम प्रधान मधु देवी ने बताया कि श्मशान घाट पर टिनशेड और पक्के चबूतरे के निर्माण के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से मांग की गई, लेकिन बजट के अभाव में अब तक कार्य नहीं हो सका। उन्होंने आश्वासन दिया कि बजट उपलब्ध होते ही निर्माण कराया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल बरौली ही नहीं, बल्कि पवलोई, धौरपुर और सोखना सहित कई गांवों के श्मशान घाटों की स्थिति भी चिंताजनक है। पवलोई में श्मशान स्थल पर झाड़ियां उगी हुई हैं, जबकि धौरपुर में खुले मैदान में अंतिम संस्कार करना बारिश के मौसम में बेहद कठिन हो जाता है। इससे पहले 9 जुलाई को सोखना गांव में भी दो महिलाओं का अंतिम संस्कार तिरपाल की ओट में करना पड़ा था। ग्रामीणों ने प्रशासन से सभी श्मशान घाटों पर शीघ्र पक्के चबूतरे, टिनशेड और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं प्रशासन का कहना है कि जनपद के अंत्येष्टि स्थलों के जीर्णोद्धार का कार्य चरणबद्ध तरीके से कराया जा रहा है तथा जिन स्थानों के लिए बजट स्वीकृत हो चुका है, वहां निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।






