
हाथरस 30 जुलाई । स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के सरकारी दावों के बीच विकास खंड के कोका गांव में वर्ष 2023 में करीब 30.42 लाख रुपये की लागत से निर्मित स्वास्थ्य उपकेंद्र आज तक शुरू नहीं हो सका है। डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति न होने के कारण भवन में ताले लटके हुए हैं और महज तीन वर्षों में ही इमारत जर्जर होने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उपकेंद्र शुरू न होने से उन्हें छोटी-छोटी बीमारियों के उपचार के लिए भी हाथरस जिला मुख्यालय जाना पड़ता है या फिर मजबूरी में झोलाछाप डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि कोका, अल्हेपुर, कोकड़ी चौराहा, खेड़ा परसोली और परसारा क्षेत्र में बिना वैध डिग्री के कई झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम क्लीनिक संचालित कर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। उनका कहना है कि पूर्व में भी ऐसे मामलों में कई लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से स्वास्थ्य उपकेंद्र को जल्द शुरू कराने और अवैध रूप से प्रैक्टिस कर रहे झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में सीएचसी महौ के प्रभारी डॉ. साहब सिंह ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) की कमी के कारण उपकेंद्र पर नियुक्ति नहीं हो सकी है। इस संबंध में शासन को पत्र भेजा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है तथा कुछ मामलों की जांच चल रही है। साक्ष्य मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।






