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हाथरस 20 जुलाई। जिला कृषि रक्षा अधिकारी निखिल देव तिवारी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से प्रदेश के कई जनपदों में लेप्टोस्पायरोसिस एवं स्क्रब टाइफस के मामले सामने आए हैं। जनपद में विशेष संचारी रोग नियंत्रण जागरूकता अभियान का द्वितीय चरण 1 जुलाई से 31 जुलाई तक संचालित किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत कृषि विभाग जनसहभागिता एवं क्षेत्रीय कर्मचारियों के सहयोग से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। उन्होंने बताया कि चूहे एवं छछूंदर (रोडेंट्स) फसलों को 10 से 15 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ प्लेग, स्क्रब टाइफस एवं लेप्टोस्पायरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों के वाहक भी होते हैं। ऐसे में इनका प्रभावी नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि खेतों एवं घरों के आसपास नियमित साफ-सफाई रखने, झाड़ियों एवं कूड़े-करकट को हटाने तथा चूहों के बिलों की निगरानी करने से उनकी संख्या को नियंत्रित किया जा सकता है। चूहेदानी का उपयोग कर रोटी, ब्रेड या बिस्कुट जैसे आकर्षक चारे के माध्यम से भी चूहों को पकड़ा जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों के निर्देशानुसार अनुमोदित चूहा नियंत्रण रसायनों का सुरक्षित उपयोग भी किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा चूहा एवं छछूंदर नियंत्रण के लिए छह दिवसीय कार्ययोजना अपनाने की सलाह दी गई है। इसमें पहले दो दिनों तक बिलों की पहचान एवं निरीक्षण, तीसरे दिन बिना विष वाला चारा रखने, चौथे दिन वैज्ञानिक तरीके से विषयुक्त चारा उपयोग करने, पांचवें दिन मृत चूहों का सुरक्षित निस्तारण तथा छठे दिन बिलों को बंद कर पुनः निरीक्षण करने की प्रक्रिया शामिल है। यदि बिल दोबारा सक्रिय मिलें तो यही प्रक्रिया पुनः अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि स्क्रब टाइफस एक संक्रामक रोग है, जो संक्रमित चूहों एवं छछूंदरों पर पाए जाने वाले सूक्ष्म परजीवी (चिगर्स/लार्वा माइट्स) के माध्यम से मनुष्यों में फैलता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, शरीर पर लाल चकत्ते, गले में सूजन तथा काटे गए स्थान पर काली पपड़ी बनना शामिल हैं। वहीं लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमित जानवरों जैसे चूहा, छछूंदर, कुत्ता एवं बिल्ली के संपर्क या उनके मूत्र से दूषित पानी के संपर्क में आने से फैलने वाला जीवाणुजनित रोग है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, सिर एवं मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, दस्त, भूख कम लगना तथा आंखों में लालिमा या पीलापन शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने नागरिकों से अपील की कि घरों में खाद्य एवं पेय पदार्थों को हमेशा ढककर रखें, चूहा नियंत्रण रसायनों को बच्चों की पहुंच से दूर रखें तथा मृत चूहों का सुरक्षित तरीके से गड्ढा खोदकर मिट्टी में दबाकर निस्तारण करें। उन्होंने बरसात के मौसम में जलभराव रोकने, नालों एवं तालाबों के किनारे उगी झाड़ियों की नियमित सफाई करने तथा मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए रोजमेरी, सिट्रोनेला ग्रास, गेंदा, नीम, तुलसी, लेमन ग्रास एवं लैवेंडर जैसे मच्छररोधी पौधे लगाने की भी सलाह दी।

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