हाथरस 17 जुलाई। हलवाई खाना स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़े मंदिर में आयोजित धर्मसभा में मुनि श्री 108 शिवदत्त जी महाराज एवं मुनि श्री 108 पदमदत्त जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान महावीर के आदर्शों पर चलने का संदेश दिया। मुनि श्री शिवदत्त जी महाराज ने कहा कि माता-पिता से बड़ा इस संसार में कोई नहीं है। आज के समय में कई लोग अपने माता-पिता को सम्मान और दो वक्त की रोटी तक नहीं दे पा रहे हैं, जबकि बचपन में माता स्वयं भूखी रहकर अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है। यदि जीवन को सार्थक और धन्य बनाना है तो सबसे पहले माता-पिता की सेवा करनी चाहिए और समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूजा तभी फलदायी होती है जब उसे पूरी श्रद्धा, विधि और भावना के साथ किया जाए। मंदिर में की जाने वाली प्रत्येक धार्मिक क्रिया का अपना आध्यात्मिक महत्व है, जिसे समझकर ही उसका पालन करना चाहिए। मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य को भाग्य जानने के लिए हाथ दिखाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि अपने कर्मों को श्रेष्ठ बनाना चाहिए। उन्होंने नारी की महत्ता बताते हुए कहा कि वही महान व्यक्तित्वों को जन्म देती है और परिवार व समाज के निर्माण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अपने प्रवचन में मुनि श्री ने आपसी प्रेम, भाईचारे और वैर-भाव समाप्त करने का संदेश देते हुए कहा कि यदि हम किसी का अहित नहीं करेंगे तो हमारा भी अहित नहीं होगा। उन्होंने समाज में बढ़ती दूरियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज भाई-भाई और भाई-बहन के बीच संवाद समाप्त होता जा रहा है, जिसे प्रेम और संस्कारों से पुनः स्थापित करना होगा। अंत में उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से प्रतिदिन मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करने और भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान मुनि श्री की आहारचर्या श्री उमाशंकर जैन एवं श्री संतोष जैन रेडीमेड वालों के यहां हुई। इस अवसर पर जैन समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।







