
हाथरस 15 जुलाई। देश का सबसे भव्य और ऐतिहासिक रथयात्रा महोत्सव भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा के रूप में प्रसिद्ध है। यह विश्वविख्यात रथयात्रा प्रतिवर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया (दौज) को ओडिशा के पुरी से प्रारंभ होती है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन करते हैं। रथयात्रा के दौरान तीन भव्य रथ निकाले जाते हैं। भगवान जगन्नाथ नंदीघोष रथ पर, भगवान बलभद्र तालध्वज रथ पर तथा देवी सुभद्रा दर्पदलन (देवदलन) रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करते हैं। रथयात्रा प्रारंभ होने से पहले पुरी के गजपति महाराजा द्वारा सोने की झाड़ू से रथों के मार्ग की सफाई करने की परंपरा निभाई जाती है, जिसे ‘छेरा पहरा’ कहा जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और सेवा, समानता तथा विनम्रता का संदेश देती है। भगवान जगन्नाथ की इस विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्ता को सम्मान देते हुए भारत सरकार के संचार मंत्रालय के डाक विभाग ने इस पर ₹5 मूल्य का स्मारक डाक टिकट भी जारी किया है। यह डाक टिकट रथयात्रा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। हाथरस के प्रसिद्ध डाक टिकट संग्राहक शैलेंद्र वार्ष्णेय सर्राफ के संग्रह में यह दुर्लभ स्मारक डाक टिकट धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सुरक्षित है। उनका कहना है कि ऐसे स्मारक डाक टिकट देश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संजोने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उल्लेखनीय है कि हाथरस शहर में भी भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा के कई प्राचीन मंदिर हैं। यहां भी प्रतिवर्ष जगन्नाथ रथयात्रा बड़े उत्साह, श्रद्धा और भक्ति के साथ निकाली जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेकर भगवान के दर्शन एवं रथ के दर्शन का पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।









