
नई दिल्ली 15 जुलाई। निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने के मामलों में दवा कंपनियों से करीब 8,447 करोड़ रुपये की वसूली अब भी लंबित है। सरकार के मार्च 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 1979 से अब तक दर्ज अधिकांश मामले लंबे समय से अदालतों में विचाराधीन हैं, जिसके कारण मूल बकाया पर ब्याज और अन्य देनदारियां लगातार बढ़ती गई हैं। सरकार ने दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) लागू किया है। इसके बावजूद कई दवा कंपनियों पर निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने के आरोप लगे, लेकिन वर्षों बाद भी इन मामलों का अंतिम निस्तारण नहीं हो सका है।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) के रिकॉर्ड के अनुसार, ओवरचार्जिंग के मामलों में एबॉट, फाइजर, सैंडोज इंडिया, बायर इंडिया, जेबी केमिकल्स, वायथ, कैडिला, एलेम्बिक, इंटास फार्मास्यूटिकल्स और लाइका लैब्स जैसी प्रमुख कंपनियों के नाम दर्ज हैं। अधिकांश मामलों में कानूनी विवाद जारी हैं, जबकि कुछ मामलों में वसूली की प्रक्रिया अभी भी चल रही है। रिकॉर्ड के मुताबिक, कई मामलों में मूल ओवरचार्ज की राशि अपेक्षाकृत कम थी, लेकिन वर्षों तक मामला लंबित रहने के कारण ब्याज और पेनाल्टी जुड़ने से देनदारी कई गुना बढ़ गई। उदाहरण के तौर पर, मेरिंड लिमिटेड पर लगभग 21.34 करोड़ रुपये के ओवरचार्ज का मामला बढ़कर करीब 88.44 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें अब भी लगभग 20.71 करोड़ रुपये की वसूली शेष है। इसी प्रकार वायथ के एक मामले में कुल देनदारी करीब 48 करोड़ रुपये और लाइका लैब्स के एक मामले में 23 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है।
आंकड़ों में एबॉट लैबोरेटरीज, फाइजर, बायर इंडिया, कैडिला, एलेम्बिक, जे.बी. केमिकल्स, सैंडोज इंडिया, इंटास फार्मास्यूटिकल्स, लाइका लैब्स, वायथ तथा निकोलस पिरामल (अब पिरामल फार्मा समूह का हिस्सा) जैसी बड़ी कंपनियों के नाम भी शामिल हैं। इनमें अधिकांश मामलों की स्थिति न्यायालय में विचाराधीन है, जबकि कुछ मामलों में वसूली की कार्रवाई जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया चलने से न केवल सरकारी वसूली प्रभावित होती है, बल्कि ब्याज और जुर्माने के कारण कंपनियों की देनदारी भी लगातार बढ़ती जाती है। ऐसे में इन मामलों का शीघ्र निस्तारण मरीजों के हित और दवा मूल्य नियंत्रण व्यवस्था की प्रभावशीलता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।









