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सादाबाद 04 जुलाई। तहसील में पिछले 26 दिनों से जारी दस्तावेज लेखक, अधिवक्ता, टाइपिस्ट, मुंशियों और स्टांप वेंडरों की हड़ताल समाप्त हो गई है। इस निर्णय के बाद सोमवार से तहसील परिसर में दस्तावेज लेखन और रजिस्ट्री संबंधी सभी कार्य सामान्य रूप से फिर से शुरू हो जाएंगे। हड़ताल उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 4 जून को ई-रजिस्ट्री व्यवस्था लागू करने के निर्णय के विरोध में की गई थी। प्रदेशभर के दस्तावेज लेखक, अधिवक्ता, टाइपिस्ट और मुंशी इस व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। आरोप था कि ई-रजिस्ट्री की नई प्रणाली से हजारों लोगों के सामने रोजगार का संकट पैदा होगा और पारंपरिक दस्तावेज लेखन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होगी। दस्तावेज लेखक संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि सरकार ने 29 जून को संबंधित आदेश को निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही, वर्ष 2024 के ई-रजिस्ट्री शासनादेश में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए आईजी स्टांप को एक प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रस्ताव में अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों की भूमिका एवं उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक संशोधन करने की बात कही गई है। सरकार के इस निर्णय के बाद सादाबाद तहसील के सभी दस्तावेज लेखक, अधिवक्ता, टाइपिस्ट, मुंशी और स्टांप वेंडर एकमत हुए। उन्होंने 26 दिनों से जारी अपनी हड़ताल को स्थगित करने का फैसला लिया। हड़ताल समाप्त होने से तहसील परिसर में लंबे समय से ठप पड़े कार्यों के दोबारा शुरू होने की उम्मीद है, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी।तहसील में रजिस्ट्री और अन्य दस्तावेज संबंधी लंबित कार्यों के निस्तारण का मार्ग प्रशस्त हो गया है। पिछले 26 दिनों से लोगों को अपने महत्वपूर्ण कार्यों के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था, जिन्हें अब राहत मिलने की उम्मीद है। हड़ताल समाप्त करने के निर्णय के लिए आयोजित दस्तावेज लेखक संगठन की बैठक में पूर्व सहायक लेखा परीक्षक श्याम सुंदर गिरी, अध्यक्ष राजकुमार दीक्षित, अशोक कुमार, हजारीलाल सक्सेना, शंकरलाल गोला, विनोद बाबू, बीपी सिंह, यश जायसवाल, तपन जोहर और दीपू शर्मा सहित बड़ी संख्या में दस्तावेज लेखक उपस्थित थे।

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