
लखनऊ 04 जुलाई । उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण प्रशासन को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में 13,116 पंचायत सचिवों की भर्ती को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत में अलग पंचायत सचिव की तैनाती का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। वर्तमान समय में कई पंचायत सचिव एक साथ कई ग्राम पंचायतों का कार्यभार संभाल रहे हैं, जिससे विकास कार्यों और प्रशासनिक सेवाओं के संचालन में देरी होती है। नई भर्ती के बाद प्रत्येक ग्राम पंचायत को अपना अलग सचिव मिलेगा, जिससे पंचायत स्तर पर कार्यों में तेजी और पारदर्शिता आएगी। जानकारी के अनुसार, पंचायती राज विभाग द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव को वित्त विभाग और ग्राम्य विकास विभाग ने भी सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है। अब भर्ती प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए शासन स्तर पर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। हर ग्राम पंचायत में अलग सचिव की तैनाती होने से ग्रामीणों को पंचायत से संबंधित कार्यों के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र, आय, निवास और अन्य पंचायत संबंधी सेवाएं अधिक तेजी से उपलब्ध हो सकेंगी। साथ ही ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और शिकायतों के निस्तारण में भी सुधार आएगा। नई नियुक्तियों के बाद पंचायत सचिव गांवों में विकास योजनाओं की नियमित निगरानी, सरकारी अभिलेखों का बेहतर रखरखाव, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे ग्राम पंचायतों की प्रशासनिक व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा ग्रामीणों को समयबद्ध और पारदर्शी सेवाएं मिल सकेंगी। प्रदेश सरकार का यह निर्णय ग्रामीण प्रशासन को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
























