
हाथरस 03 जुलाई। जिले में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित खाद्य प्रसंस्करण योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राप्त प्रस्तावों में से आठ परियोजनाओं को स्वीकृति मिल चुकी है। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से जिले में कृषि आधारित उद्योगों को नई गति मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। योजना के तहत सरकार खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने वाले निवेशकों को परियोजना लागत का 35 प्रतिशत अथवा अधिकतम पांच करोड़ रुपये तक का अनुदान उपलब्ध करा रही है। इस योजना का लाभ उठाकर जिले में नमकीन, डेयरी, फल एवं सब्जी प्रसंस्करण, फ्रोजन फूड, मसाला और दाल प्रसंस्करण जैसी विभिन्न इकाइयों की स्थापना की जा रही है।
स्वीकृत परियोजनाओं में एसएमसी एग्री लिमिटेड के निवेशक अमित अग्रवाल द्वारा सब्जियों के भंडारण के लिए एकीकृत कोल्ड चेन की स्थापना की गई है। अल्फा मिल्क फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के विपिन गुप्ता ने मक्खन एवं पनीर के परिवहन से जुड़ी परियोजना शुरू की है। एआर एंटरप्राइजेज की अनीता सिंह ने डिब्बाबंद फल एवं सब्जियां, सॉस तथा संबंधित उत्पादों की निर्माण इकाई स्थापित की है। इसी क्रम में फन ईट्स फूड प्रोडक्ट्स के मुकेश आंधीवाल ने फ्रूट जूस निर्माण इकाई, वनस्पति फ्रोजन फूड प्राइवेट लिमिटेड के शुभम जैन ने फ्रोजन फल एवं सब्जियां, सोया चाप एवं रेडी-टू-ईट उत्पादों की इकाई तथा वृंदावनांता फूड्स एमएफजी इंडिया एलएलपी की पारुल शर्मा ने टमाटर सॉस एवं क्यूलिनरी पेस्ट निर्माण इकाई स्थापित की है। इसके अतिरिक्त आरबी हींग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के रतन बिहारी अग्रवाल ने हींग निर्माण इकाई का आधुनिकीकरण कराया है, जबकि एलएस फूड्स एलएलपी के हर्षुल अग्रवाल ने अरहर दाल प्रसंस्करण इकाई स्थापित की है।
खाद्य प्रसंस्करण अधिकारी योगेश्वरी सिंह ने बताया कि इन परियोजनाओं से जिले में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा, वहीं प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन और विपणन के क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। साथ ही स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को प्रदेश एवं देश के अन्य बाजारों तक पहुंचाने में भी सुविधा मिलेगी। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भी खाद्य प्रसंस्करण योजना के अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक उद्यमियों से पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर योजना का लाभ उठाने की अपील की गई है। विभाग का मानना है कि अधिक से अधिक निवेशकों के आगे आने से जिले में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों का दायरा और विस्तृत होगा तथा औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।





















