
हाथरस 30 जून। जीएसटी की बिल टू-शिप टू प्रणाली में लागू किए जाने वाले नए नियम को फिलहाल अगस्त तक स्थगित कर दिया गया है। इसके चलते कारोबारियों को बड़ी राहत मिली है और वे अभी पहले की तरह ई-वे बिल तैयार कर सकेंगे। नई व्यवस्था के तहत ई-वे बिल में बिल बनाने वाली फर्म और माल प्राप्त करने वाली फर्म, दोनों का जीएसटीएन (GSTIN) अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाना प्रस्तावित था। फिलहाल इस नियम के लागू होने पर रोक लगा दी गई है। अब तक ई-वे बिल बनाते समय केवल आवश्यक विवरण दर्ज किए जाते थे और जिस फर्म के पते पर माल भेजा जाता था, उसका जीएसटीएन दर्ज करना अनिवार्य नहीं था। कर विभाग का मानना है कि इससे कुछ मामलों में फर्जी बिलिंग, इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के दुरुपयोग और कर चोरी की आशंका बनी रहती थी। इन्हीं अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से दोनों फर्मों का जीएसटीएन दर्ज करना अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया था।
हालांकि, व्यापारियों और कर सलाहकारों ने नई व्यवस्था को लागू करने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग की थी। उनका कहना है कि नए नियम के अनुरूप सॉफ्टवेयर और बिलिंग सिस्टम में आवश्यक तकनीकी बदलाव अभी पूरी तरह नहीं हो सके हैं। व्यापारी नेता तरुण पंकज ने कहा कि नया नियम लागू होने के बाद ई-वे बिल प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी। बिल जारी करने वाली फर्म और वास्तविक माल प्राप्त करने वाली फर्म, दोनों का जीएसटीएन दर्ज होने से माल की आवाजाही का सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा और कर प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी। उपायुक्त राज्य कर आरके सिंह ने बताया कि फिलहाल इस नए नियम को अगस्त तक स्थगित किया गया है। तब तक कारोबारी पूर्व व्यवस्था के अनुसार ही ई-वे बिल तैयार कर सकेंगे।






















