सादाबाद 25 जून। आपातकाल, भारतीय राजनीति इतिहास का काला धब्बा, जिसे पांच दशक पूरे हो चुके हैं लेकिन उसकी कड़वी यादें आज भी लोकतंत्र सेनानियों के जेहन में ताजा है। 25 जून 1975 की रात देश में आपातकाल लगा था। जो 21 मार्च 1977 तक रहा था। उस दौरान सरकार की मनमानी आज भी लोगों के रौंगटे खड़े कर देती है। जगह जगह बने जेलखाने, जबरन नसबंदी, लोगों की गिरफ्तारी, आजादी पर पाबंदी लोग भूल नहीं पाते। इस दौरान रात में लोग आपातकाल के विरोध में पोस्टर और दीवारों पर नारे लिखते थे। रातभर पुलिस दबिश देती थी। क्षेत्र के 17 से अधिक लोग जेल गए थे। कस्बे के लोकतंत्र सेनानियों ने मांग की है कि 75 वर्ष उम्र पूरी कर चुके लोकतंत्र रेलवे यात्रा में छूट का उपहार दिया जाना चाहिए। कस्बे के दिनेश चंद वार्ष्णेय, सोमप्रकाश वार्ष्णेय, माधव प्रकाश गोयल, डॉ. नारायण दत्त शर्मा, पूर्व विधायक रामशरण आर्य उर्फ लहटू ताऊ, पूरन चंद्र अग्रवाल, केशव देव गर्ग, कुंदनलाल, रामखिलोनी, सहपऊ के अशोक शाह, थरौरा के कप्तान सिंह यादव, बिसावर के तुलसीदास अग्रवाल व राजपाल सिंह, मढ़ाका के रमेश चंद्र, सोरई के सुरेश चंद्र, रामू दर्जी मथुरा के वीरेंद्र सिंह अधिवक्ता को आपातकाल का विरोध करने के जुर्म में 11 जनवरी 1976 को मथुरा से गिरफ्तार कर लिया गया। 18 दिन तक जेल में रहने के बाद 29 जनवरी को जमानत पर रिहा किया गया। इन्होंने जगह-जगह पोस्टर लगाने के अलावा दीवार लेखन कर आपात काल के खिलाफ आवाज उठाई। अक्टूबर 1994 को आपातकाल के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले लोगों को लोकतंत्र सेनानी का दर्जा दिया गया और इनके लिए पेंशन की व्यवस्था की गई। लोकतंत्र सेनानी दिनेश चंद्र वार्ष्णेय बताते हैं कि आपातकाल की नींव 12 जून, 1975 को ही पड़ गई थी। इस दिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को रायबरेली के चुनाव अभियान में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग का दोषी पाया था और उनके चुनाव को खारिज कर दिया था। इतना ही नहीं इंदिरा गांधी पर छह वर्ष तक चुनाव न लड़ने और किसी भी तरह का पद सम्भालने पर भी रोक लगा दी गई थी। 24 जून, 1975 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला बरकरार रखा था लेकिन इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री पद की कुर्सी पर बने रहने की इजाजत दे दी थी। तब जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा गांधी के इस्तीफा देने तक देश भर में रोज प्रदर्शन करने का आह्वान किया। इसके चलते इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगा दिया था। नारायण दत्त शर्मा बताते हैं कि यह वो दिन था जब नागरिकों के मौलिक अधिकारों को स्थगित कर दिया गया था। इमरजेंसी के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण अडवाणी, मुलायम सिंह यादव समेत विपक्ष के तमाम बड़े नेता जेलों में ठूंस दिए गए थे। आपातकाल लगते ही अखबारों पर सेंसर बैठा दिया गया। बिसावर के तुलसीदास अग्रवाल ने दर्द बयां करते हुए कहा कि उस समय जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर गरीब मजदूरों की जबरन नसबंदी कराई। हर तरफ दहशत का माहौल था। आज आपातकाल को भुलाने की कोशिशें की जाती हैं लेकिन लोग काले दिनों के अनुभवों को कैसे भूल सकते हैं। सोमप्रकाश वार्ष्णेय बताते हैं कि आपातकाल की घोषणा के बाद कृष्णा वैदिक पुस्तकालय में मीटिंग करते हुए सुल्तान सिंह पचौरी, मास्टर प्रताप सिंह वर्मा, सुरेश चंद वार्ष्णेय, कैलाश चंद, श्री गोपाल जैसवाल, प्रेम बल्लभ, माधव प्रकाश आदि के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। आपातकाल के खिलाफ भूमिगत गतिविधियों का मुख्य केंद्र उनका आवास और वेदराम प्रजापति का आवास हुआ करता था, जो आबादी से दूर था। रात में लोकतंत्र सेनानी पुलिस से बचने के लिए यहीं शरण लिया करते थे।
About Author
Ayog Deepak
Ayog Deepak is an Indian journalist and businessperson who is the chairman and Editor-in-chief of Hamara Hathras News.
Check latest article from this author !
अनियंत्रित डंपर की चपेट में आकर भट्टे के मुनीम की मौत
June 25, 2026
Related Posts
Recent Posts
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा
June 25, 2026
अनियंत्रित डंपर की चपेट में आकर भट्टे
June 25, 2026
हाथरस में कॉल सेंटर पर एसडीएम का
June 25, 2026
सड़क हादसे में घायल जवान की इलाज
June 25, 2026
सादाबाद : हड़ताल को पूर्व विधायक ने
June 25, 2026
सादाबाद : आपातकाल के दौरान स्थगित कर
June 25, 2026
Weather
Hathras
12:56 am,
Jun 26, 2026
clear sky
23 %
1013 mb
9 mph
Wind Gust:
9 mph
Clouds:
6%
Visibility:
10 km
Sunrise:
6:39 am
Sunset:
6:20 pm
Weather from OpenWeatherMap

























