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सिकन्दराराऊ (हसायन) 25 जून ।  कस्बा के इन्द्रनगर सिकतरा सलेमपुर मार्ग स्थित मोहल्ला अहीरान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा स्थल पर श्री मद भागवत कथा स्थल पर गोगा जहारवीर की कथा का आयोजन कराया गया।गोगा जहारवीर कथा का व्याख्यान करने वाले आचार्य नाथ गोपाल ने गोगा जहारवीर की कथा के प्रसंग का मामिर्क व्याख्यान किया।आचार्य नाथ गोपाल ने बताया कि वैदिक सनातन धर्म में हिन्दू अनुयाईयों के द्वारा जाहरवीर गोगाजी जिन्हें गोगा पीर और जाहर पीर भी कहा जाता है राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में पूजे जाने वाले एक अत्यंत लोकप्रिय वीर और लोक देवता है,उन्हें मुख्य रूप से ‘साँपों के देवता’ और रक्षक के रूप में पूजा जाता है।इनका जन्म राजस्थान के चूरू जिले के ददरेवा गाँव में चौहान क्षत्रिय राजा ज़ेवर सिंह जेवर जी और रानी बाछल देवी के घर हुआ था।रानी बाछल देवी को बहुत समय तक कोई संतान नहीं हुई।तब वह महान संत गुरु गोरखनाथ की शरण में गई। गुरु की कृपा और आशीर्वाद से उन्हें एक दिव्य फल प्राप्त हुआ,जिसे खाने से जाहरवीर (गोगाजी) का जन्म हुआ।जब गोगाजी का जन्म हुआ,तो वे एक सर्प के साथ खेल रहे थे। गुरु गोरखनाथ द्वारा दिए गए वरदान और उनकी अद्भुत वीरता के कारण ही उन्हें “जाहर पीर” अर्थात साक्षात प्रकट देवता या पीर की उपाधि मिली।गोगाजी का राज्य सतलुज नदी से लेकर हरियाणा के हांसी तक फैला हुआ था।उनका विवाह कोलुमंड (जोधपुर) के राजा बुड़ोजी राठौर की पुत्री कैमल दे के साथ हुआ था।गोगाजी के विवाह के बाद उनके अपने ही सगे मौसेरे भाइयों अर्जुन और सुरजन से संपत्ति को लेकर विवाद हो गया।इस विवाद के चलते एक भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें गोगाजी के हाथों उनके दोनों भाई मारे गए।अपने ही भाइयों की मृत्यु से गोगाजी की माता बाछल बहुत दुखी हुईं और उन्होंने गोगाजी को घर छोड़ने का श्राप दे दिया।माता के आदेश का पालन करते हुए गोगाजी ने अपने गुरु गोरखनाथ का ध्यान किया।गुरु के आशीर्वाद से धरती में एक दरार बांबी बनी और वे अपने घोड़े सहित जीवित ही धरती में समा गए समाधि ले ली।वर्तमान में राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में गोगामेड़ी धुरमेड़ी नाम का प्रसिद्ध स्थान स्थित है,जहाँ उन्होंने समाधि ली थी।हर साल भाद्रपद कृष्ण नवमी गोगा नवमी पर विशाल मेला लगता है,जहाँ दूर-दूर से ‘पूर्बिया’ भक्त आकर उनकी पूजा करते है।उन्हें सर्प दंश से मुक्ति दिलाने वाले देवता के रूप में माना जाता है,और उनके नाम की भभूत (राख) को संकट के समय बहुत चमत्कारी माना जाता है।नाथ गोपाल ने कहा कि गोगा जहारवीर की कथा का श्रवण व पाठ करने मात्र से मनुष्य के सभी कष्ट स्वंय ही समाप्त हो जाते है।गोगा जी महाराज की कथा के प्रसंग के दौरान धार्मिक चौपाई भजन पर महिलाएं नाचते हुई दिखाई दी।

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