हसायन 16 जून । कस्बा हसायन स्थित सौ वर्ष से अधिक पुराने ऐतिहासिक जलाशय एवं झील के अस्तित्व को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्रीय लोगों ने आरोप लगाया है कि वर्षों से राजस्व अभिलेखों में हुए बदलावों और कथित अवैध कब्जों के चलते ऐतिहासिक जलाशय का मूल स्वरूप लगभग समाप्त हो गया है। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर जलाशय को उसके पुराने स्वरूप में बहाल करने की मांग की है। स्थानीय लोगों के अनुसार हसायन का यह विशाल जलाशय कभी कस्बे की पहचान हुआ करता था। यहां आयोजित होने वाला ऐतिहासिक जल बिहार मेला तथा सनातन धर्म की रामलीला भी इस जलाशय से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रहे हैं। लोगों का कहना है कि समय के साथ जल स्रोतों के सूखने और उचित संरक्षण के अभाव में जलाशय पर भू-माफियाओं की नजर पड़ी, जिसके बाद धीरे-धीरे इसका स्वरूप बदलता चला गया। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि वर्तमान में जलाशय की कई भूमि आवासीय, कृषि एवं अन्य उपयोगों में परिवर्तित दिखाई दे रही है, जबकि पुराने अभिलेखों में यह भूमि जलाशय के रूप में दर्ज थी। लोगों का कहना है कि यदि पुराने राजस्व रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। स्थानीय नागरिकों ने यह भी चिंता व्यक्त की है कि जलाशय के समाप्त होने से क्षेत्र के भूजल स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उनका मानना है कि यदि जलाशय का संरक्षण एवं पुनर्जीवन किया जाए तो इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों और स्थानीय नागरिकों को भी लाभ मिलेगा।
भूमि विवाद को लेकर हुआ तनाव, दोनों पक्षों पर मुकदमा दर्ज
इधर कस्बा हसायन के मोहल्ला किलाखेड़ा स्थित कथित झील एवं जलाशय भूमि को लेकर हाल ही में विवाद भी सामने आया। जानकारी के अनुसार भूमि की पैमाइश को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मारपीट की घटना हो गई, जिसमें कई लोगों के घायल होने की सूचना है। घटना के बाद कस्बे के मुख्य बाजार में कई घंटों तक धरना-प्रदर्शन किया गया। बाद में उपजिलाधिकारी सिकंदराराऊ द्वारा मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से वार्ता की गई, जिसके बाद धरना समाप्त हुआ। मामले में हसायन पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। हालांकि दर्ज मुकदमों के संबंध में विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसे लेकर क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की चर्चाएं चल रही हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐतिहासिक जलाशय की भूमि, राजस्व अभिलेखों एवं कथित अतिक्रमणों की निष्पक्ष जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर और जल संरक्षण व्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सके।






















