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हाथरस। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के अवसर पर खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़ों ने जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर चिंताजनक तस्वीर पेश की है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में लिए गए 491 खाद्य नमूनों में से 298 नमूने अधोमानक पाए गए हैं। यानी बाजार में बिक रही आधे से अधिक खाद्य सामग्री निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी। सबसे अधिक गड़बड़ी मसालों, दूध एवं दुग्ध उत्पादों तथा खाद्य तेलों में पाई गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार कई नमूने ऐसे भी मिले हैं जो ‘असुरक्षित’ श्रेणी में रखे गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे खाद्य पदार्थ सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। इसके बावजूद कार्रवाई मुख्य रूप से सैंपलिंग, नोटिस जारी करने और न्यायालयों में लंबित मुकदमों तक सीमित दिखाई दे रही है।

मसालों में मिलावट का जाल

जांच में सामने आया है कि पिसी लाल मिर्च में ईंट का चूरा, लकड़ी का बुरादा और सिंथेटिक लाल रंग मिलाया जाता है। हल्दी पाउडर को अधिक पीला और आकर्षक दिखाने के लिए लेड क्रोमेट एवं मेटानिल यलो जैसे रसायनों का उपयोग किया जाता है। धनिया पाउडर में विभिन्न प्रकार की अशुद्ध सामग्री और कृत्रिम सुगंध मिलाने के मामले भी सामने आए हैं। वहीं काली मिर्च में पपीते के सूखे बीज मिलाए जाने की शिकायतें मिली हैं।

दूध और डेयरी उत्पाद भी संदेह के घेरे में

खाद्य विशेषज्ञों के अनुसार सिंथेटिक दूध तैयार करने के लिए यूरिया, डिटर्जेंट, तेल और अन्य रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं मावा और पनीर में स्टार्च, सस्ते तेल तथा अन्य मिलावटी पदार्थ मिलाए जाने के मामले भी सामने आते रहे हैं। त्योहारों के मौसम में ऐसे मामलों की संख्या और बढ़ जाती है।

खाद्य तेल में मिलावट से स्वास्थ्य पर खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि सरसों के तेल में आर्जीमोन तेल की मिलावट गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। इसके अलावा महंगे तेलों में सस्ते पाम ऑयल और अन्य रिफाइंड तेलों की मिलावट भी आम है। कई मामलों में प्रतिबंधित रंगों का उपयोग कर तेल को आकर्षक बनाया जाता है।

एक नजर में आंकड़े

  • कुल वैध फूड लाइसेंस : 430
  • पंजीकृत खाद्य प्रतिष्ठान एवं स्टॉल : 8,753
  • वर्ष 2025-26 में लिए गए नमूने : 491
  • अधोमानक पाए गए नमूने : 298

लंबी कानूनी प्रक्रिया बनी चुनौती

अधोमानक पाए गए नमूनों के मामलों में एडीएम एवं एसडीएम न्यायालयों में मुकदमे दर्ज कराए गए हैं, लेकिन लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण बाजार में इसका प्रभाव सीमित दिखाई देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मिलावटखोरी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए त्वरित कार्रवाई और दोषियों के नाम सार्वजनिक किए जाने जैसे कदम आवश्यक हैं।

सहायक आयुक्त खाद्य रणधीर सिंह ने बताया कि लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए नियमित जांच अभियान चलाए जाते हैं। रेहड़ी-पटरी संचालकों के यहां भी मोबाइल वैन के माध्यम से सैंपलिंग की जाती है और खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाता है। उन्होंने कहा कि नमूने अधोमानक अथवा असुरक्षित पाए जाने पर नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाती है तथा असुरक्षित खाद्य पदार्थों को नष्ट भी कराया जाता है। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर सामने आए ये आंकड़े उपभोक्ताओं के लिए सतर्क रहने का संदेश दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य पदार्थ खरीदते समय गुणवत्ता, पैकेजिंग और लाइसेंस संबंधी जानकारी की जांच अवश्य करनी चाहिए।

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