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सिकंदराराऊ (पुरदिलनगर) 29 मई । विद्या भारती से सम्बद्ध जन शिक्षा समिति ब्रज प्रदेश द्वारा आयोजित नवचयनित आचार्य एवं प्रधानाचार्य पुनश्चर्या प्रशिक्षण वर्ग के अंतर्गत शुक्रवार को सरस्वती विद्या मन्दिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में वैचारिक सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता जन शिक्षा समिति ब्रज प्रदेश के मंत्री दयाल शर्मा ने “हमारी प्रेरणा का आधार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं पंच परिवर्तन का अनुसरण” विषय पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विकास एक सतत प्रक्रिया है तथा समाज और राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालय संचालन की जिम्मेदारी विद्या भारती प्रभावी रूप से निभा रही है। दयाल शर्मा ने बताया कि वर्ष 1952 में गोरखपुर के पक्की बाग में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना हुई थी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचार विद्यालयों के माध्यम से परिवारों तक पहुँचते हैं तथा वर्तमान में संघ का कार्य विश्व के अनेक देशों तक विस्तारित हो चुका है। उन्होंने कहा कि समाज में सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रभक्ति जागृत करने हेतु संघ सतत कार्य कर रहा है। सत्र में प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि गुरुकुल परंपरा समाज आधारित थी और समाज के सहयोग से संचालित होती थी। वर्तमान समय में भी समाज परिवर्तन के लिए संगठित प्रयास आवश्यक हैं। कार्यक्रम में कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रीय चेतना जैसे विषयों पर विशेष बल दिया गया। इस अवसर पर राजेश कुमार चैचाणी एवं चोब सिंह वर्मा ने मुख्य वक्ता दयाल शर्मा को पटका पहनाकर एवं चित्र भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में देवेंद्र यादव, संदीप मिश्रा, यशपाल सिंह, कमलप्रकाश द्विवेदी, विचित्रपाल, महेन्द्रपाल सिंह, राजेश कुमार, श्रीनिवास सिंह, योगेंद्र सिंह, कृष्णकांत, राकेश कुमार, शिशुपाल सिंह, हरपाल सिंह, विक्रम सिंह, राजन सिंह, अनिल कुमार एवं प्रवीन कुमार सहित अनेक आचार्य एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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