
लखनऊ 11 मई । इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने आम जनता, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य एवं शांति को ध्यान में रखते हुए ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि रात 10 बजे के बाद शादी-विवाह और अन्य सामाजिक समारोहों में होने वाले तेज शोर को सख्ती से रोका जाए। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने धर्मपाल यादव की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार, पुलिस प्रशासन, नगर निगम और एलडीए को निर्देशित किया है कि वे इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित ध्वनि मानकों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें।
पार्कों और खेल मैदानों का बनेगा सरकारी डेटाबेस
अदालत ने उत्तर प्रदेश के सभी 18 मंडलों के कमिश्नर और जिलाधिकारियों को आदेश दिया है कि वे अपने क्षेत्रों में स्थित पार्कों, खेल के मैदानों और खुली जगहों का विस्तृत सर्वे करें। इन स्थानों को ‘उत्तर प्रदेश पार्क, खेल मैदान और खुली जगह संरक्षण और विनियमन अधिनियम, 1975’ के तहत सरकारी सूची में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिनियम की धारा 6 के अनुसार, इन स्थानों का उपयोग केवल उसी निर्धारित उद्देश्य के लिए किया जा सकता है, जिसके लिए वे बने हैं।
व्यावसायिक उपयोग पर जताई चिंता
जनेश्वर मिश्र पार्क के व्यावसायिक उपयोग पर आपत्ति जताते हुए हाईकोर्ट ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) को अपनी नीति पर पुनर्विचार करने को कहा है। अदालत ने टिप्पणी की कि पार्कों में होने वाली व्यावसायिक गतिविधियों और शोर का बुरा असर वहां रहने वाले पक्षियों, अन्य जीवों और पर्यावरण पर पड़ता है। रिहायशी इलाकों में आयोजित समारोहों में भी तय सीमा से अधिक शोर पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी कार्रवाई का आदेश दिया गया है।
अधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारी
हाईकोर्ट ने सभी संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द ऐसे पार्कों और खुले स्थानों का पूरा ब्यौरा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें। अदालत ने यह साफ कर दिया है कि बिना सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के इन सार्वजनिक स्थलों के स्वरूप और उपयोग में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जा सकेगा।





















