
हाथरस 07 मई । जे.टी.आर.आई. लखनऊ के निर्देशानुसार एवं जनपद न्यायाधीश विनय कुमार-III की अध्यक्षता में जनपद न्यायालय हाथरस के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। सतत सीखने के वातावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में अपर सिविल जज (व.प्र.) दीपक नाथ सरस्वती ने नए आपराधिक कानूनों (भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम) के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नए कानूनों के प्रभावी होने से न्यायपालिका अधिक स्वतंत्र और सशक्त होगी। विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं, जिससे पीड़ितों को त्वरित चिकित्सा परीक्षण और संवेदनशील न्याय मिलना सुनिश्चित होगा।
कार्यशाला के दौरान बताया गया कि नए कानूनों के तहत सात साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे दोषसिद्धि दर (Conviction Rate) को 90 प्रतिशत तक ले जाने में मदद मिलेगी। कानून की नई व्यवस्था ऐसी है कि एफआईआर दर्ज होने से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की प्रक्रिया अधिकतम तीन वर्ष में पूर्ण हो सकेगी। नागरिकों की सुविधा के लिए ‘जीरो एफआईआर’ और ‘ई-एफआईआर’ की शुरुआत की गई है, जिसके तहत किसी भी थाना क्षेत्र में अपराध दर्ज कराया जा सकता है। साथ ही, अब पुलिस को गिरफ्तार व्यक्ति के परिवार को सूचना देने के लिए एक नोडल अधिकारी नामित करना अनिवार्य होगा। जानकारी दी गई कि भारतीय न्याय संहिता 2023 में ‘हिट एंड रन’ मामलों की धारा 106(2) को फिलहाल रोक दिया गया है, जबकि अन्य प्रावधान लागू हैं।
इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश (परिवार न्यायालय) बाबू राम, अपर जनपद न्यायाधीश संगीता शर्मा, हर्ष अग्रवाल, निर्भय नरायन राय, विजय कुमार, शैलेन्द्र सिंह, ईश्वर सिंह, बुशरा आदिल रिजवी, महेन्द्र कुमार रावत सहित नोडल अधिकारी प्रशांत कुमार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सूरज मिश्रा और जिले के समस्त न्यायिक अधिकारीगण उपस्थित रहे। सभी ने नए कानूनों की बारीकियों को समझा और इसे न्याय प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव बताया।


























