
हाथरस 01 मई । न्यायालय के आदेश पर दर्ज कराया गया धोखाधड़ी का मुकदमा विवेचना में झूठा पाया गया है। पुलिस जांच में सामने आया कि वादी ने तथ्य छिपाकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचक ने एफआईआर को एक्सपंज करते हुए वादी के खिलाफ न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत की है। अलीगढ़ रोड औद्योगिक आस्थान निवासी राजुल मोहता ने 10 फरवरी को कोतवाली हाथरस गेट में अपने पार्टनर अजय कुमार शर्मा, विशेष शर्मा, राजकुमार व सीए प्रवीन जैन व सौरभ शुक्ला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि कंपनी में सीए की मदद से तीनों पार्टनर ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर शेयर खरीद लिए और उन्हें निदेशक पद से हटा दिया। एग्रीमेंट में सात लाख रुपये दिए जाने की बात लिखी थी, जो खाते में नहीं आए। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद निरीक्षक आदित्य शंकर तिवारी ने विवेचना शुरू की। जांच में पुलिस ने पाया कि वादी ने व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता के चलते वास्तविक तथ्यों को छिपाकर झूठा अभियोग दर्ज कराया। साढ़े चार लाख रुपये के शेयर हड़पने व जान से मारने की धमकी जैसे आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। विवेचक ने न्यायालय में पेश खारिजी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि वादी व उनके भाई द्वारा कंपनी का सामान चोरी-छिपे बेचा जा रहा था। पैसा कंपनी के खाते में न डालकर निजी खाते में लिया जा रहा था। घटना की जानकारी होने पर वादी ने खुद ही निदेशक पद से त्याग पत्र दिया था। बाकी पार्टनर ने सात लाख रुपये आरटीजीएस किए थे, लेकिन वादी ने ही अपने खाते में जमा-निकासी पर रोक लगा दी थी। एसएचओ हाथरस गेट नितिन कसाना ने बताया कि प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर दोनों सीए व पार्टनर के खिलाफ दर्ज एफआईआर एक्सपंज कर दी गई है। वादी राजुल मोहता के खिलाफ कार्रवाई के लिए न्यायालय में रिपोर्ट भेजी गई है।





















