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हाथरस 25 अप्रैल । अलीगढ़ रोड स्थित रामोजी रिजोर्ट के सभागार में ज्ञान कला संजीवनी समिति एवं ब्रज कला केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित डॉ. जगदीश लवानिया स्मृति अखिल भारतीय कवि सम्मेलन अभूतपूर्व रूप से सफल रहा। श्रोताओं से खचाखच भरे सभागार में देर रात तक ठहाकों, तालियों और काव्य रसधारा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ शारदा एवं डॉ. जगदीश लवानिया के चित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर राजेश कुमार सिंह (डिविजनल कमांडर होमगार्ड्स), आर.के. सिंह (डिप्टी कमिश्नर जीएसटी), प्रद्युम गुप्ता, दीपक कुमार (अग्निशमन अधिकारी), उदित नारायण मिश्र (लखनऊ), गजेन्द्र शर्मा, दीपक गोयल सहित अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित किया। पं. मुखिया जी के मंत्रोच्चार और पं. गणेश चन्द्र बशिष्ठ के शंखनाद से वातावरण आध्यात्मिक हो उठा। कार्यक्रम का संचालन हास्य कवि अनिल अग्रवंशी ने अपने विशिष्ट अंदाज में किया, जबकि सरस्वती वंदना डॉ. रुचि चतुर्वेदी (आगरा) ने प्रस्तुत की। कवि सम्मेलन में देशभर से आए कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मध्यम सक्सेना, लटूरी लठ्ठ, अमन अक्षर, श्रद्धा शौर्य, डॉ. अर्जुन सिंसौदिया, डॉ. रुचि चतुर्वेदी और बलराम श्रीवास्तव सहित कई कवियों ने प्रेम, भक्ति, वीर रस और श्रृंगार से भरपूर काव्य पाठ किया। अंत में संचालक अनिल अग्रवंशी ने अपनी हास्यपूर्ण पंक्तियों से समापन करते हुए वातावरण को उल्लासपूर्ण बना दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नारी शक्ति, चिकित्सक, अधिवक्ता, कवि, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इस आयोजन के मुख्य आयोजक प्रगल्भ लवानिया (असिस्टेंट कमिश्नर एक्साइज) एवं ललित लवानिया रहे। संयोजन डॉ. प्रीती लवानिया तथा सह-संयोजन चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने अत्यंत कुशलता से संभाला। विशेष रूप से चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य की संगठन क्षमता और सक्रिय भूमिका ने कार्यक्रम को नई ऊँचाई प्रदान कीइस अवसर पर डॉ. जगदीश लवानिया स्मृति सम्मान से ब्रजभाषा की वरिष्ठ कवयित्री डॉ. रुचि चतुर्वेदी को अंगवस्त्र, प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह एवं 21,000 रुपये की सम्मान राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की व्यवस्था अदिति लवानिया ने संभाली तथा अध्यक्षता आशु कवि अनिल बौहरे ने की। यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और सामाजिक समरसता का एक यादगार उत्सव बन गया।

 

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