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हाथरस 24 अप्रैल । करोड़ों रुपये की जमीन के सौदे में धोखाधड़ी को लेकर कोर्ट के आदेश पर सदर कोतवाली में आरोपियों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत किया गया है। शायरा प्रोजेक्ट्स प्रा.लि. के निदेशक श्याम सुंदर खेतान ने कोर्ट में दायर प्रार्थना पत्र संख्या में बताया कि 22 अक्टूबर 2020 को अशोक कुमार रावत और संजीव रावत पुत्र मुन्ना लाल, निवासी कमला बाजार सासनी गेट ने उन्हें बताया कि लाल वाला पेच, चामड गेट हाथरस में करीब 12,500 वर्ग मीटर जमीन है। यह जमीन भू-स्वामी दीनानाथ अग्रवाल की है और कई पट्टेदारों को दीर्घकालीन पट्टे पर दी हुई है। आरोपितों ने दावा किया कि 26 मई 2006 को उन्होंने दीनानाथ अग्रवाल से इस जमीन का इकरारनामा करा रखा है और पांच लाख रुपये अदा किए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पट्टेदारों से लीज ट्रांसफर की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। धन की कमी बताकर उन्होंने प्रार्थी कंपनी से आर्थिक मदद मांगी और एमओयू करने की इच्छा जताई। 22 अक्टूबर 2020 को नोएडा सेक्टर-63 स्थित आफिस में एमओयू हुआ। तय हुआ कि आरोपित कंपनी को 200 वर्ग मीटर के पांच पूर्ण विकसित फ्री होल्ड भूखंड 10 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से देंगे। कुल सौदा एक करोड़ रुपये का था। एमओयू के तहत उसी दिन कंपनी ने 25 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए अशोक रावत की फर्म रावत प्रकाशन मंदिर के खाते में ट्रांसफर कर दिए। आरोपितों ने भरोसा दिलाया कि 10 माह में यानी 31 अगस्त 2021 तक जमीन का अर्जन, विकास और बैनामा कराकर कब्जा दे देंगे। एमओयू में साफ लिखा था कि यदि तय तारीख तक बैनामा और कब्जा नहीं दिया गया तो इकरारनामे की तिथि से ली गई रकम पर 24 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। साथ ही पेनाल्टी के रूप में जमा 25 लाख रुपये या बाद में दी गई रकम पर भी 24 प्रतिशत ब्याज अलग से देना होगा। यह भी तय हुआ कि भूखंड देने में विफल रहने पर किसी भी भूखंड की बिक्री के भुगतान पर प्रथम अधिकार प्रार्थी कंपनी का होगा और पूरी अर्जित भूमि कंपनी के पास रहन रहेगी।

कंपनी का आरोप है कि अशोक और संजीव रावत ने डरा-धमकाकर और झूठा विश्वास दिलाकर धीरे-धीरे कुल 1,12,50,000 रुपये ले लिए। सारी रकम फंड ट्रांसफर से दी गई। आरोप है कि रहन रखी संपत्ति में से अशोक रावत ने चार भूखंडों के बैनामे कर दिए और पैसे खुद हड़प लिए। बैनामे 30 सितंबर 2022 को नंदलाल चतुर्वेदी के नाम 81.2 वर्ग मीटर का 8.54 लाख में, चार फरवरी 2023 को मनोज अग्रवाल व पंकज कुमार गर्ग के नाम 161.86 वर्ग मीटर का 17 लाख में, कंचन गर्ग के नाम 333.84 वर्ग मीटर का 35.06 लाख में और विजय कांत शर्मा के नाम 242.46 वर्ग मीटर का 32.73 लाख में किए गए। आरोप है कि आरोपितों ने 12500 वर्ग मीटर जमीन के बीच में स्थित 1055.18 वर्ग मीटर का एक भूखंड दीपक गर्ग से 95.90 लाख में कंपनी के पक्ष में अलग से करा दिया। इसका बैनामा 17 अगस्त 2021 को कंपनी के नाम हुआ। कंपनी का कहना है कि एमओयू में इस जमीन का जिक्र दीपक अग्रवाल 1119 वर्ग मीटर के नाम से था। दीपक गर्ग और दीपक अग्रवाल एक ही व्यक्ति हैं और सही क्षेत्रफल 1055.18 वर्ग मीटर है। कंपनी ने आरोप लगाया कि अशोक और संजीव रावत ने कंपनी की अनुमति के बिना बैनामा वाली जमीन के निर्माण तोड़ दिए। खुद को कंपनी का स्वामी दिखाकर और तथ्य छिपाकर नक्शा पास करा लिया। श्याम सुंदर खेतान ने बताया कि 27 मार्च 2025 को एडीजीपी आगरा और एसपी हाथरस को शिकायत दी थी। डीआईजी अलीगढ़ के आदेश पर सहायक पुलिस अधीक्षक ने जांच की और बयान भी दर्ज किए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरन 25 जनवरी 2026 को कोर्ट में अर्जी दी है। कंपनी ने कोतवाली हाथरस को मुकदमा दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई का आदेश देने की मांग की है। कोर्ट के आदेश पर अभियोग पंजीकृत कर लिया गया है। पुलिस इस मामले में विवेचना कर रही है।

 

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