
हाथरस 15 अप्रैल । मुख्य विकास अधिकारी पीएन दीक्षित द्वारा विकास खण्ड हाथरस के अंतर्गत भोपतपुर स्थित गौ आश्रय स्थल का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी विजय कुमार यादव, खण्ड विकास अधिकारी डी.पी. सिंह, पशुधन प्रसार अधिकारी भागीरथ एवं ग्राम प्रधान योगेन्द्र सिंह उपस्थित रहे। ग्राम पंचायत सचिव विवेक कुमार अपनी पत्नी के उपचार हेतु अवकाश पर बताए गए।
निरीक्षण में पाया गया कि गौ आश्रय स्थल को 30,000 ईंटें दान में प्राप्त हुई हैं, जिनसे 12.5 मीटर लंबा एवं 6.50 मीटर चौड़ा नया भूसा घर बनाया गया है, जबकि लगभग 10,000 ईंटें अभी शेष हैं। आश्रय स्थल में कुल 262 गौवंश मौजूद मिले, जिनमें 29 नर एवं 233 मादा शामिल हैं। दो गौवंश डिहाइड्रेशन से प्रभावित पाए गए, जिनका उपचार चिकित्सक द्वारा किया जा रहा है। मार्च 2026 में 6 तथा अप्रैल माह में अब तक 2 गौवंश की मृत्यु हुई है। सीडीओ ने नर एवं मादा गौवंश को अलग-अलग रखने के निर्देश दिए। वर्तमान में आश्रय स्थल में 7 केयरटेकर तैनात हैं, जिनमें 5 दिन में और 2 रात्रि में कार्यरत हैं। यहां 3 शेड, 3 चरही, 2 पानी की होदी, बिजली कनेक्शन एवं समरसेबल पंप की व्यवस्था है। साथ ही 3 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, जिनके स्थान पर सोलर पैनल आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के निर्देश दिए गए, ताकि बिजली बाधित होने पर भी निगरानी जारी रह सके। आश्रय स्थल में 5 सोलर लाइट भी लगी हुई हैं। परिसर को तार से घेरा गया है, किन्तु बाउंड्री के पास स्थित गहरे पक्के कुएं को लोहे के जाल से ढकने के निर्देश दिए गए। ग्राम प्रधान ने बताया कि आश्रय स्थल से सटी 16-18 बीघा ऊसर भूमि में गौवंश के लिए ज्वार (हरा चारा) की बुआई कराई गई है। सीडीओ ने एक अतिरिक्त बड़े शेड के निर्माण की आवश्यकता जताते हुए खंड विकास अधिकारी को अनुपयोगी लोहे के पाइपों से शीघ्र निर्माण कराने के निर्देश दिए। इसके अलावा ग्राम प्रधान ने अनुरोध किया कि वर्तमान में 12 दूरस्थ ग्राम पंचायतों द्वारा पूलिंग की धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है, जिसके स्थान पर समीप की ग्राम पंचायतों को नामित किया जाए। इस पर सीडीओ ने तत्काल प्रस्ताव जिला पंचायत राज अधिकारी को भेजने के निर्देश दिए। निरीक्षण में गौशाला में 239 कुंतल भूसा तथा 41 बोरी चोकर एवं खल उपलब्ध पाया गया। गोबर से तैयार खाद का उपयोग पास की भूमि में हरे चारे के उत्पादन में किया जा रहा है। सीडीओ ने गौशाला की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने तथा एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र को सक्रिय करने के निर्देश दिए। साथ ही गोबर के उचित निस्तारण हेतु नाडेप एवं वर्मी कम्पोस्ट पिट के माध्यम से जैविक खाद तैयार करने के निर्देश भी दिए।