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सिकंदराराऊ (हसायन) 11 अप्रैल । अप्रैल माह के द्वितीय शनिवार को कोतवाली परिसर में आयोजित ‘समाधान दिवस’ केवल औपचारिकता बनकर रह गया। शनिवार, 11 अप्रैल को आयोजित इस शिविर में सुबह 10 बजे से ही राजस्व और चकबंदी विभाग के लेखपालों का अता-पता नहीं था। हैरानी की बात यह रही कि दोपहर तक कोई भी तहसील या जिला स्तरीय प्रशासनिक अधिकारी फरियादियों की समस्या सुनने नहीं पहुँचा, जिसके चलते दूर-दराज से आए ग्रामीण घंटों इंतजार के बाद मायूस होकर वापस लौट गए। समाधान दिवस में बदइंतजामी का आलम यह था कि जहाँ फरियादी अपनी समस्याओं के निस्तारण की उम्मीद में बैठे थे, वहीं राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) रामनरेश कोतवाली परिसर में इधर-उधर टहलते नजर आए। कुछ पुलिस उपनिरीक्षक गोलघर कार्यालय में आपस में मंत्रणा करते दिखे, लेकिन जनता की सुनवाई के लिए कोई सक्षम मंच नजर नहीं आया। दोपहर 2 बजे तक किसी भी उच्चाधिकारी के न आने से प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम इंद्रनगर सिकतरा से आए ग्रामीण पूर्व रालोद जिलाध्यक्ष महेंद्रपाल सिंह, हरीश कुमार, मुनीश कुमार, रामजीलाल और सत्यपाल सिंह आदि ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि वे चकबंदी विभाग की कार्यप्रणाली से परेशान हैं। इससे पूर्व वे 1 अप्रैल को जिलाधिकारी अतुल वत्स से मिलने भी गए थे, जहाँ उनकी अनुपस्थिति में ओसी कलेक्ट्रेट और एडीएम वित्त बसंत अग्रवाल को शिकायती पत्र सौंपा गया था, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। आज समाधान दिवस में भी चकबंदी लेखपालों के न होने से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। मामले में जब राजस्व निरीक्षक रामनरेश से अधिकारियों की अनुपस्थिति के बारे में पूछा गया, तो वे कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। उन्होंने बताया कि जमीनी विवाद से संबंधित केवल दो शिकायतें आईं, जिन्हें निस्तारण के लिए लेखपालों को सौंप दिया गया है।

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