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सिकंदराराऊ (हसायन) 24 मार्च । चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि, मंगलवार को जनपद के कस्बा से लेकर देहात क्षेत्रों तक शक्ति की भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। वैदिक सनातन धर्म की प्राचीन पौराणिक परंपरा के अनुसार, चैत्र नवरात्रि के छठे दिन श्रद्धालुओं ने आदि शक्ति के षष्ठम स्वरूप ‘माँ कात्यायनी’ की पूरी निष्ठा के साथ स्तुति की। भोर की पहली किरण के साथ ही नगर और ग्रामीण क्षेत्रों के देवी मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने महामाई के दरबार में जल और दुग्ध से अभिषेक किया, जिससे वातावरण घंटों और घड़ियालों की गूँज से गुंजायमान हो उठा।

घरों में भी सुबह से ही विशेष पूजा-अर्चना का दौर जारी रहा। भक्तों ने अपने घरों में ज्योति प्रज्वलित कर दुर्गा चालीसा का पाठ किया और गाय के गोबर से बने उपले की अग्यारी पर घृत, लौंग, कपूर और बतासे अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिरों में सुरक्षा और व्यवस्था के बीच ‘जय माता दी’ के जयकारों से पूरा परिवेश भक्तिमय बना रहा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माँ कात्यायनी की पूजा से भक्तों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसी विश्वास के साथ देर शाम तक मंदिरों में दर्शन-पूजन का क्रम चलता रहा।

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