
प्रयागराज 06 अप्रैल । उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और सस्ता बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। परिषद ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि आगामी सत्र 2026-27 से राजकीय, सहायता प्राप्त और निजी (स्ववित्त पोषित) सभी स्कूलों में केवल अधिकृत पाठ्यपुस्तकों से ही पढ़ाई कराई जाएगी। अनधिकृत किताबों या महंगी गाइडों को छात्रों पर थोपने वाले स्कूलों और शिक्षकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
महंगी किताबों के खेल पर लगाम
परिषद के निरीक्षण में सामने आया कि कई निजी प्रकाशकों की किताबें परिषदीय पुस्तकों की तुलना में 149% से लेकर 361% तक महंगी बेची जा रही थीं। इस आर्थिक बोझ से अभिभावकों को बचाने के लिए अब कक्षा 9 से 12 तक के सभी प्रमुख विषयों के लिए अधिकृत किताबें तय कर दी गई हैं। इसमें एनसीईआरटी (NCERT) की 70 किताबों सहित हिंदी, संस्कृत और उर्दू की 12 चयनित पुस्तकें शामिल हैं।
7 अंकों का कोड होगा असली किताब की पहचान
बाजार में नकली और पाइरेटेड किताबों पर रोक लगाने के लिए परिषद ने सुरक्षा मानक तय किए हैं। हर अधिकृत किताब के कवर पेज पर 7 अंकों का अल्ट्रा वायलेट फ्लोरोसेंट लाल रंग का सीरियल नंबर होगा। जिस किताब पर यह नंबर नहीं होगा, उसे अवैध माना जाएगा और संबंधित विक्रेता या प्रकाशक पर कॉपीराइट एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होगा।
15 अप्रैल तक चलेगा विशेष अभियान
नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए 15 अप्रैल 2026 तक पूरे प्रदेश में सघन निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा। जिला और मंडल स्तर के अधिकारियों को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही, अभिभावकों को जागरूक करने के लिए जिलों में ‘पुस्तक जागरूकता शिविर’ भी आयोजित किए जाएंगे।
इन तीन एजेंसियों को मिली जिम्मेदारी
किताबों की छपाई और वितरण के लिए परिषद ने तीन प्रमुख एजेंसियों को अधिकृत किया है जिसमें पायनियर प्रिंटर्स (आगरा), पीताम्बरा बुक्स (झांसी) एवं सिंघल एजेंसीज (लखनऊ) शामिल है।






















