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लखनऊ 10 मार्च । सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को राजधानी लखनऊ में यूपी कैबिनेट की बैठक हुई और इसमें जमीनों की रजिस्ट्री से जुड़े एक अहम प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। प्रस्ताव को मिली मंजूरी के मुताबिक, अब प्रदेश में कोई भी संपत्ति बेचने से पहले विक्रेता के नाम और दस्तावेजों का मिलान खतौनी में किया जाएगा। अगर नाम सही है, तभी रिजस्ट्री होगी अन्यथा नहीं। नाम का मिलान ना होने पर मामले की जांच की जाएगी। यह फैसला रजिस्ट्री प्रक्रिया में फर्जीवाड़े को रोकने और पूरे सिस्टम को पारदर्शी बनाने के मकसद से लिया गया है। आज लखनऊ में हुई योगी कैबिनेट की बैठक में 31 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें से 30 को कैबिनेट ने अपनी मंजूरी दे दी। हालांकि, इनमें सबसे अहम फैसला जमीन रजिस्ट्री को लेकर रहा। उत्तर प्रदेश सरकार में स्टांप, कोर्ट फीस और रजिस्ट्रेशन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने बताया कि यह प्रस्ताव स्टांप और रजिस्ट्री विभाग की तरफ से आया था, जिसे कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई है।

खतौनी से होगा दस्तावेजों का मिलान

कैबिनेट फैसले के मुताबिक, यूपी में अब किसी भी जमीन की रजिस्ट्री कराने से पहले मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेजों का मिलान खतौनी से किया जाएगा। सत्यापन होने के बाद ही रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सत्यापन के लिए रिवेन्यू रिकॉर्ड भी चेक किए जाएंगे। अगर दस्तावेजों का मिलान खतौनी से नहीं होता है, तो रिवेन्यू विभाग इसकी जांच करेगा।

10 वर्ष का होगा संचालन अनुबंध

ग्रामीण बस सेवा योजना के तहत बसों की औसत आयु 15 वर्ष तय की गई है, जबकि संचालन का अनुबंध 10 वर्ष का होगा। सरकार के अनुसार प्रदेश में करीब 5000 ऐसे गांव हैं जहां अब तक कभी बस नहीं पहुंची। शुरुआत में प्रत्येक रूट पर दो बसें चलाई जाएंगी। इसके साथ ही मोटर व्हीकल कानून में संशोधन कर केंद्र सरकार के नियमों को अपनाया जाएगा। इसके तहत Ola और Uber जैसे एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म को राज्य में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। ड्राइवरों की फिटनेस जांच, मेडिकल टेस्ट और पुलिस वेरिफिकेशन भी अनिवार्य किया जाएगा। एग्रीगेटर के लिए आवेदन शुल्क 25 हजार रुपये और लाइसेंस फीस 5 लाख रुपये तय की गई है, जबकि लाइसेंस का नवीनीकरण हर पांच साल में 5 हजार रुपये शुल्क के साथ होगा। राज्य सरकार अपना परिवहन ऐप भी विकसित करेगी, जिसमें ड्राइवरों की पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी और उनकी ट्रेनिंग भी कराई जाएगी।

शहरी आवास योजना की सीमा बढ़ी

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत 22 वर्गमीटर तक के आवास की लागत सीमा 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 9 लाख रुपये कर दी गई है। अब 30 वर्गमीटर तक मकान का निर्माण किया जा सकेगा। इसमें राज्य सरकार की ओर से 1 लाख रुपये और केंद्र सरकार की ओर से 1.5 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। इसके अलावा सरकार ने कांशीराम आवास योजना के खाली पड़े मकानों की मरम्मत और रंगाई-पुताई कराकर उन्हें दलित परिवारों को देने का निर्णय लिया है। साथ ही सरकारी कर्मचारियों की सेवा नियमावली में संशोधन करते हुए छह माह के मूल वेतन से अधिक निवेश की जानकारी देना और हर वर्ष अचल संपत्ति की घोषणा करना अनिवार्य किया गया है।

शिक्षकों को मिलेगा कैशलेस इलाज

कैबिनेट ने शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए चिकित्सा प्रतिपूर्ति व्यवस्था में बदलाव को मंजूरी दी है। अब अशासकीय विद्यालयों के शिक्षकों को भी कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी और इस योजना में कर्मचारियों को भी शामिल किया जाएगा। योजना के तहत प्रति शिक्षक लगभग 2479 रुपये का प्रीमियम खर्च आएगा। इससे प्रदेश के 1.28 लाख से अधिक शिक्षकों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। इसके लिए राज्य सरकार पर करीब 31.92 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। सरकार के अनुसार इस योजना से जुड़े निजी अस्पतालों में भी शिक्षकों और कर्मचारियों को बेहतर और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

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