
हाथरस 19 जनवरी । प्रदेश में नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश की प्रक्रिया इस बार तीन चरणों में पूरी कराई जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग ने नए सत्र 2026-27 के लिए विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है, जिसके अनुसार निजी विद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया 2 फरवरी से शुरू होगी। इस साल पहली बार आरटीई में अभिभावकों के आधार से प्रवेश दिया जा सकेगा और इसी आधार लिंक खाते में किताब-कॉपी आदि के पैसे का भुगतान भी किया जाएगा। प्रथम चरण में आवेदन 2 से 16 फरवरी तक होंगे, और बीएसए द्वारा आवेदन पत्रों का सत्यापन इसी दौरान किया जाएगा। इस चरण की लॉटरी 18 फरवरी को निकाली जाएगी और बीएसए द्वारा विद्यालयों को आवंटन के अनुसार नामांकन करने के आदेश 20 फरवरी तक जारी किए जाएंगे। दूसरे चरण में आवेदन 21 फरवरी से 7 मार्च तक होंगे और लॉटरी 9 मार्च को जारी की जाएगी, जबकि आवश्यक आदेश 11 मार्च तक जारी किए जाएंगे। तीसरे चरण में आवेदन और सत्यापन 12 से 25 मार्च के बीच होंगे, लॉटरी 27 मार्च को निकाली जाएगी और 29 मार्च तक आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। विद्यालयों को आवंटित बच्चों को 11 अप्रैल तक प्रवेश सुनिश्चित करना होगा।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी जिलों के डीएम को निर्देश दिए हैं कि आवेदन शुरू होने से पहले जिले के सभी गैर सहायतित मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षा की कुल क्षमता का न्यूनतम 25 फीसदी के आधार पर शत-प्रतिशत मैपिंग व रजिस्ट्रेशन कराया जाए। नए सत्र में आरटीई में प्रचार-प्रसार, आवेदन सत्यापन और विद्यालय आवंटन के बाद 100 प्रतिशत नामांकन के लिए ब्लॉकवार नोडल अधिकारी भी नामित किए जाएंगे। जानकारी के अनुसार, नए सत्र 2026-27 में प्रदेश के 68 हजार निजी विद्यालयों की मैपिंग की गई है और यहां की 6.80 लाख से अधिक सीटों पर इस साल प्रवेश के लिए आवेदन लिए जाएंगे। पिछले साल 3.34 लाख से अधिक आवेदन आए थे, जिनमें से 2.52 लाख आवेदन स्वीकृत हुए और 1.85 लाख सीटें एलॉट हुई थीं। वहीं 1.41 लाख से ज्यादा बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित किया गया था। महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने यह भी कहा है कि डीएम कार्यालय, मुख्य विकास अधिकारी, खंड विकास अधिकारी, जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बीएसए और बीईओ कार्यालय में आरटीई हेल्पडेस्क बनाई जाए। इन हेल्पडेस्क पर ऑनलाइन आवेदन करने में असमर्थ अभिभावकों का ऑनलाइन आवेदन कराने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार और समस्याओं का समाधान करेंगे।

















