Hamara Hathras

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हाथरस 18 जनवरी । मुख्यमंत्री द्वारा ‘एक जनपद-एक व्यंजन योजना के अंतर्गत हाथरस की रबड़ी को शामिल किए जाने की घोषणा के बाद जिले के रबड़ी कारोबारियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इस योजना के तहत रबड़ी उद्योग को प्रोत्साहन, ब्रांडिंग और विपणन में सहयोग मिलने की उम्मीद है। हाथरस की रबड़ी अपनी विशिष्ट स्वाद, शुद्धता और पारंपरिक विधि के लिए दूर-दूर तक मशहूर है। शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी हजारों परिवार इसी व्यवसाय से जुड़े हैं। हाथरस की रबड़ी की मांग दिल्ली और आसपास के महानगरों तक है। और अब व्यापारियों का मानना है कि अगर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात जैसी सुविधाएं मिलें, तो यह अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँच सकती है। हालांकि रबड़ी की मियाद लगभग 24 घंटे होती है, लेकिन सही सुविधाओं से इसे लंबा भी किया जा सकता है। इससे रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे और जिले की पहचान भी बढ़ेगी। रबड़ी की कीमतें 300 से 360 रुपये प्रति किलो तक हैं। शहरी क्षेत्रों में 360 रुपये तक बिकती है, जबकि दिल्ली भेजी जाने वाली रबड़ी के थोक भाव 300 से 350 रुपये प्रति किलो हैं। और बात हो अगर इतिहास की, तो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी हाथरस की रबड़ी के मुरीद रहे हैं। 1994 में काका हाथरसी पुरस्कार समारोह के दौरान उन्होंने हाथरस की रबड़ी का स्वाद लिया था और मंच से भी इसकी तारीफ की थी। कारोबारियों का कहना है कि सरकार यदि इस उद्योग को पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात के जरिए प्रोत्साहित करे, तो हाथरस की रबड़ी का नाम दुनिया भर में होगा। हालांकि रबड़ी की मियाद अधिकतम 24 घंटे होती है, लेकिन अगर सुविधाएं दी जाएं तो इसके समय को बढ़ाया जा सकता है, इससे न केवल जिले की पहचान बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

 

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