
हाथरस 23 अगस्त। सरकारी विद्यालयों की बदहाल व्यवस्थाओं से जुड़े वीडियो और अभियान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आने के बाद अब शासन और प्रशासन की सक्रियता बढ़ गई है। 17 अगस्त को मुख्यमंत्री की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद सीडीओ ने जिले के सरकारी विद्यालयों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए 19 बिंदुओं पर रिपोर्ट तलब की है। चेकलिस्ट में विद्यालय भवन, कक्षाओं की स्थिति, पेयजल, शौचालय, फर्नीचर, बाउंड्रीवाल समेत विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अन्य मूलभूत सुविधाओं की जानकारी शामिल है। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत जिन विद्यालयों में कमियां मिलेंगी, उन्हें दूर कराने की कवायद की जाएगी। सीडीओ ने बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक सहित छह जिला स्तरीय अधिकारियों को प्रतिदिन एक-एक विद्यालय का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को विद्यालयों में बाउंड्रीवाल सहित कायाकल्प के 19 पैरामीटर पूरे कराने, निपुण भारत मिशन के तहत बच्चों की प्रगति की समीक्षा करने, पांच दिन पढ़ाई और छठवें दिन गतिविधियां कराने तथा मिड-डे मील की गुणवत्ता की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। प्रधानाध्यापकों को महीने में एक बार अभिभावकों और छात्रों से संवाद कर सकारात्मक शैक्षिक वातावरण बनाने को कहा गया है। इसके अलावा कौशल विकास के लिए बैठकें आयोजित करने, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और अन्य मूलभूत सुविधाएं दुरुस्त कराने पर भी जोर दिया गया है। सरकारी स्कूलों की बदहाली का मुद्दा अब राजनीतिक रूप से भी चर्चा में है। आम आदमी पार्टी और सीजेपी के अभियान के अलावा बसपा ने भी जिले में चुनावी गतिविधियों के दौरान सरकारी विद्यालयों की व्यवस्थाओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। 10 अगस्त को सादाबाद में बसपा नेता आकाश आनंद ने भाजपा सरकार के कार्यकाल में स्कूलों के बंद होने का दावा करते हुए इसे गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चों की शिक्षा से जोड़ा था। हालांकि प्रशासन की ओर से यह आधिकारिक तौर पर नहीं कहा गया है कि 19 बिंदुओं पर रिपोर्ट की प्रक्रिया सोशल मीडिया अभियान पर लगाम लगाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।













